04/02/2026

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“नरसिंहपुर: स्टेडियम ग्राउंड में प्रस्तावित मेले को लेकर नागरिकों और खिलाड़ियों में चिंता”





नरसिंहपुर में स्टेडियम ग्राउंड पर प्रस्तावित मेले को लेकर विवाद


नरसिंहपुर: स्टेडियम ग्राउंड में प्रस्तावित मेले को लेकर नागरिकों और खिलाड़ियों में चिंता

नरसिंहपुर शहर के प्रमुख स्टेडियम ग्राउंड में प्रस्तावित स्वदेशी मेले को लेकर स्थानीय लोगों, खिलाड़ियों और व्यायाम प्रेमियों में गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है। जानकारी के अनुसार, आज सुबह मैदान के बीचों-बीच मजदूरों द्वारा गड्ढे खोदे जाने की घटना सामने आई। इस स्थिति ने स्पष्ट कर दिया कि यहां किसी स्वदेशी मेले का आयोजन प्रस्तावित है।

जनसाधारण और खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया

स्थानीय खेल प्रेमी और मॉर्निंग/ईवनिंग वॉक संगठन के सदस्यों ने कहा कि जिले में स्वदेशी मेले का आयोजन स्वागत योग्य है, लेकिन इसके लिए स्थल का चयन अत्यंत सावधानीपूर्वक होना चाहिए। उनका कहना है कि स्टेडियम ग्राउंड न केवल ऐतिहासिक महत्व का स्थल है, बल्कि यह नगर का प्रमुख खेल और व्यायाम केंद्र भी है।

अभिषेक राय, समाजसेवी और खेल कार्यकर्ता, ने कहा, “यह मैदान हमारे शहर के बच्चों के लिए खेल और व्यायाम का मुख्य केंद्र है। प्रतिदिन यहां सैकड़ों बच्चे विभिन्न खेलों का अभ्यास करते हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की शारीरिक दक्षता की तैयारी करते हैं। यदि मेले का आयोजन इसी मैदान पर होता है तो बच्चों और नागरिकों की गतिविधियों पर असर पड़ेगा।”

ऐतिहासिक महत्व

स्टेडियम ग्राउंड का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है। वर्ष 1972 में यहां भारत और फ्रांस के बीच अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच आयोजित हो चुका है। इसके अलावा, यह मैदान वर्षों से नगरवासियों के लिए नियमित व्यायाम, प्रातः एवं सायं वॉक और खेल प्रतियोगिताओं का प्रमुख स्थल रहा है।

स्थानीय निवासी लक्ष्मी कहार ने कहा, “यह स्टेडियम ग्राउंड हमारे शहर के लिए केवल एक खेल मैदान नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। यदि मेले का आयोजन इस मैदान पर किया गया, तो इससे मैदान का स्वरूप और उसकी गरिमा प्रभावित होगी।”

समाज और नागरिक दृष्टिकोण

नरसिंहपुर शहर के नागरिकों ने भी प्रशासन से आग्रह किया है कि जनहित और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मेले के आयोजन के लिए अन्य उपयुक्त स्थानों का चयन किया जाए। वे मानते हैं कि स्टेडियम ग्राउंड का उद्देश्य केवल खेल और व्यायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नगरवासियों की दैनिक जीवन शैली और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी है।

अजय दुबे, रोहित पटेल, पंकज गुप्ता और संजय राजपूत जैसे स्थानीय पत्रकारों ने इस मामले की रिपोर्टिंग करते हुए कहा कि यदि मेले का आयोजन स्टेडियम ग्राउंड में होता है, तो यह बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की दैनिक गतिविधियों में बाधा डाल सकता है।

प्रशासन की भूमिका और सुझाव

समस्त खिलाड़ी, खेल प्रेमी और मॉर्निंग/ईवनिंग वॉक संगठन ने कलेक्टर महोदया से निवेदन किया है कि जनहित और ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, मेले के आयोजन के लिए अन्य उपयुक्त स्थान को अनुमति प्रदान की जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि शहर में कुछ अन्य खुले मैदान या पार्क उपलब्ध हैं, जहां यह मेला आयोजित किया जा सकता है।

इस कदम से स्टेडियम ग्राउंड की गरिमा, ऐतिहासिक महत्व और जनभावनाओं का सम्मान बना रहेगा। संगठन ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले में शीघ्र निर्णय लिया जाए ताकि किसी भी प्रकार का विवाद या असुविधा उत्पन्न न हो।

स्थानीय विशेषज्ञों की राय

स्थानीय खेल प्रशिक्षक पेराप राजपूत का कहना है, “इस मैदान का उपयोग बच्चों और युवाओं की खेल गतिविधियों के लिए होता है। यदि मेले का आयोजन इसी स्थान पर किया गया, तो खेल प्रशिक्षण प्रभावित होगा। इसलिए प्रशासन को मेले के लिए वैकल्पिक स्थल सुनिश्चित करना चाहिए।”

मुकेश संत, समाजसेवी और नागरिक मंच के सदस्य, ने कहा, “स्टेडियम ग्राउंड का संरक्षण केवल खेल और व्यायाम तक सीमित नहीं है। यह हमारी शहर की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा है। हमें इसे संरक्षित रखना होगा।”

समापन

इस प्रकार, नारसिंहपुर शहर के नागरिक, खिलाड़ी और सामाजिक संगठन स्टेडियम ग्राउंड के महत्व को देखते हुए प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि प्रस्तावित मेला किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर आयोजित किया जाए। इससे न केवल मैदान की गरिमा बनी रहेगी, बल्कि बच्चों और नागरिकों की दैनिक गतिविधियों में भी बाधा नहीं आएगी।


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