मुक्तानंद संस्कृत विद्यालय पुनरुद्धार पर संशय बरकरार, समिति ने नवरात्र बाद अगली बैठक में निर्णय टाल दिया

मुक्तानंद संस्कृत विद्यालय पुनरुद्धार पर संशय बरकरार
शहर के ऐतिहासिक मुक्तानंद संस्कृत विद्यालय के जीर्णोद्धार पर निर्णय एक बार फिर टल गया है। वर्तमान संचालन समिति ने नवरात्र के बाद अगली बैठक में फैसला करने का आश्वासन दिया है, जिससे पुनरुद्धार की प्रक्रिया फिर से अनिश्चितता में लटक गई है।
पहले भी टल चुकी हैं समय-सीमाएँ
9 सितंबर को हुई प्रारंभिक बैठक में समिति ने 16 सितंबर तक निर्णय का समय दिया था, जिसे बाद में 20 सितंबर तक बढ़ाया गया। बार-बार शेड्यूल बदलने से स्थानीय लोग और इच्छुक दानदाता असंतुष्ट हैं।
इच्छुक जनों का स्पष्ट आग्रह
प्रतिनिधि मंडल से वार्ता में उपस्थित नागरिकों ने समिति से अनुरोध किया कि या तो समिति स्वयं पुनरुद्धार का कार्य तुरंत आरंभ करे या इच्छुक लोगों को भवन निर्माण व मरम्मत की जिम्मेदारी सौंप दे। समाज के लोग बता रहे हैं कि वे स्वयं परियोजना में हाथ बटाने व धन-योगदान के लिए तैयार हैं।
लगभग 40 साल की उपेक्षा
विद्यालय पिछले चार दशकों से संगठित रखरखाव से वंचित रहा है। वर्तमान समिति द्वारा कोई ठोस विकास कार्य नहीं किया गया, जिसकी वजह से भवन जर्जर हो चुका है और गिरने की आशंका बनी हुई है। न तो यहाँ नियमित शिक्षक नियुक्त हैं और न बच्चों के बैठने के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाएं मौजूद हैं।
प्रतिनिधि मंडल से बातचीत
प्रतिनिधि मंडल ने समिति अध्यक्ष श्री सुमित झिरा से मुलाकात कर पुनरुद्धार के लिए सहयोग की पेशकश की। हालांकि, बैठक के बाद भी समिति ने कोई ठोस तरीका या कार्य-योजना सार्वजनिक नहीं की।
निष्कर्षतः,
मुक्तानंद संस्कृत विद्यालय का भविष्य फिलहाल अधर में लटका हुआ है। समिति की ओर से बार-बार निर्णय टालने से विद्यालय की स्थिति और भी खराब हो रही है। शहर के नागरिक, संस्कृत प्रेमी और शिक्षा जगत से जुड़े लोग अब बेसब्री से नवरात्र बाद होने वाली अगली बैठक की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस बार समिति कोई ठोस फैसला लेगी और शहर की इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने का मार्ग प्रशस्त होगा।



