19/04/2026

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नरसिंहपुर जिला अस्पताल की जन्म-मृत्यु शाखा में बड़ा घोटाला? महीनों से जांच जारी, फिर भी कार्रवाई शून्य — जिला प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

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जन्म-मृत्यु शाखा में बड़ा घोटाला? महीनों से जांच जारी, फिर भी कार्रवाई शून्य — जिला प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

📍 नरसिंहपुर | 🗓️ 16 अप्रैल 2026 (Thursday)

नरसिंहपुर जिला अस्पताल की जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस शाखा से जुड़े एक संदिग्ध मामले में पिछले कई महीनों से जांच जारी है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एक ऐसे व्यक्ति के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसकी वास्तविकता ही संदेह के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित व्यक्ति का अस्तित्व ही संदिग्ध है, ऐसे में यह प्रमाण पत्र किन परिस्थितियों में जारी किया गया, यह बड़ा सवाल बन गया है।

📄 मामला क्या है?

प्राप्त जानकारी के अनुसार कमल जोशी नामक व्यक्ति के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें उल्लेख है कि उनकी मृत्यु जिला अस्पताल में हुई। लेकिन जब इस मामले की गहराई से जांच की गई, तो कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और प्रक्रियाएं गायब पाई गईं।

  • मरीज की भर्ती से संबंधित कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं
  • ओपीडी पर्ची और वार्ड में भर्ती का विवरण अस्पष्ट
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं
  • मृत्यु के कारण का प्रमाण उपलब्ध नहीं

इतना ही नहीं, पुलिस विभाग द्वारा भी यह जानकारी दी गई कि संबंधित व्यक्ति का पोस्टमार्टम जिला अस्पताल में नहीं हुआ। ऐसे में यह पूरा मामला और भी संदिग्ध हो जाता है।

⚠️ महीनों से जांच, लेकिन कार्रवाई नहीं

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे मामले की जांच पिछले कई महीनों से चल रही है, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ शिकायत की गई थी, वह आज भी उसी जन्म-मृत्यु शाखा में कार्यरत है और उसी तरह काम कर रहा है। इससे यह आशंका और भी मजबूत होती है कि कहीं जांच को जानबूझकर धीमा तो नहीं किया जा रहा।

📌 जनसुनवाई में शिकायत और जांच टीम का गठन

यह मामला 23 दिसंबर 2025 को जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर महोदय/मैडम के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर द्वारा तत्काल एक जांच टीम गठित की गई थी।

गठित जांच टीम ने जिला अस्पताल की जन्म-मृत्यु शाखा का स्थल निरीक्षण कर दस्तावेजों एवं रिकॉर्ड की जांच भी की थी। प्रारंभिक स्तर पर छानबीन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक न तो कोई अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है और न ही किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।

इस स्थिति ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है और शिकायतकर्ता तथा स्थानीय लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

🔥 प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। न ही यह बताया गया है कि जांच किस स्तर पर पहुंची है और कब तक कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और पारदर्शिता बेहद आवश्यक होती है, क्योंकि यह सीधे जनता के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा होता है।

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❓ उठते बड़े सवाल

  • क्या बिना सही दस्तावेज के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया?
  • क्या जांच को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है?
  • क्या जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई होगी?
  • क्या प्रशासन इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह भविष्य में और बड़े घोटालों को जन्म दे सकता है।

यह मामला केवल एक प्रमाण पत्र का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही का है। यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो जनता का भरोसा प्रशासन से पूरी तरह उठ सकता है।

📌 जांच को लेकर सिविल सर्जन का पक्ष

इस संबंध में सिविल सर्जन श्री राजकुमार चौधरी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “जांच रिपोर्ट आने दीजिए, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।” और आप जिस कर्मचारी की बात कर रहे हो अगर वह दोषी हुआ तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी अभी अगर उसे अलग कर दिया तो पूरा काम रुक जाएगा अभी फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

🧾 शिकायतकर्ता का आरोप

वहीं शिकायतकर्ता श्री संदीप राजपूत का कहना है कि मामले को चार से पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही जांच की प्रगति के बारे में उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि जांच की स्थिति और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्होंने एक आरटीआई (RTI) भी दाखिल की है, जिसे लगभग एक महीना पूरा होने वाला है, लेकिन अब तक उसका भी कोई जवाब या सूचना उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है।

⚠️ स्थिति पर उठते सवाल

  • क्या जांच जानबूझकर लंबित रखी जा रही है?
  • क्या शिकायतकर्ता को सूचना देना आवश्यक नहीं समझा जा रहा?
  • RTI का जवाब समय पर क्यों नहीं दिया गया?
  • चार–पांच महीने बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है और लोग जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।

⚖️ Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों, शिकायत पत्र एवं स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें उल्लिखित तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा की जानी शेष है। SMP24NEWS किसी भी व्यक्ति या पक्ष पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाता है। यदि किसी संबंधित पक्ष को इस समाचार पर आपत्ति हो या वे अपना पक्ष रखना चाहते हों, तो वे हमसे संपर्क कर सकते हैं। उनका पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

📢 रिपोर्ट: SMP24NEWS

संदीप राजपूत द्वारा की गई शिकायत की कॉपी।

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