24 घंटे तक बेसहारा पड़ा रहा युवक, मोहन विश्वकर्मा ने दिखाई इंसानियत | SMP24NEWS

24 घंटे तक जिला अस्पताल में बेसहारा पड़ा रहा युवक, भैंसापाला के युवा समाजसेवी मोहन विश्वकर्मा बने फरिश्ता
नरसिंहपुर | SMP24NEWS.COM | 30 मई 2026
नरसिंहपुर जिला अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया, जहां करेली से रेफर होकर आया एक अज्ञात युवक लगभग 24 घंटे तक अस्पताल में बेसहारा हालत में पड़ा रहा। युवक की हालत इतनी गंभीर थी कि वह वार्ड क्रमांक-1 स्थित ट्रॉमा यूनिट के पलंग से बार-बार नीचे गिर रहा था, लेकिन अस्पताल परिसर में दिनभर मौजूद रहने वाले लोगों और जिम्मेदार तंत्र की नजर उस पर नहीं पड़ी।
इसी बीच भैंसापाला निवासी युवा सामाजिक कार्यकर्ता मोहन विश्वकर्मा अपने एक परिचित के इलाज के सिलसिले में जिला अस्पताल पहुंचे। जब उनकी नजर इस पीड़ित युवक पर पड़ी तो उसकी हालत देखकर वे भावुक हो गए। युवक दर्द से कराह रहा था और उसकी देखभाल करने वाला कोई भी व्यक्ति वहां मौजूद नहीं था।

बताया जा रहा है कि युवक को 29 मई 2026 को करेली से जिला अस्पताल रेफर किया गया था, लेकिन उसके परिजनों को लगभग 24 घंटे तक यह जानकारी ही नहीं मिल सकी कि वह नरसिंहपुर जिला अस्पताल में भर्ती है। इसी कारण वह पूरी तरह अकेला पड़ा हुआ था।
मोहन विश्वकर्मा से युवक की पीड़ा देखी नहीं गई। सबसे पहले उन्होंने उसकी स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया ताकि जिम्मेदार लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित हो सके। इसके बाद उन्होंने स्वयं डॉक्टरों से संपर्क कर युवक के इलाज की व्यवस्था कराई।

इतना ही नहीं, मोहन विश्वकर्मा अपने सहयोगियों के साथ युवक को स्वयं सीटी स्कैन कराने लेकर गए और उसके उपचार की निगरानी करते रहे। इसी दौरान युवक के परिजन भी अस्पताल पहुंच गए, जिन्हें मोहन विश्वकर्मा ने पूरी जानकारी देते हुए युवक को उनके सुपुर्द कर दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला अस्पताल में दिनभर सैकड़ों लोग, कर्मचारी और विभिन्न सामाजिक संगठन सक्रिय रहते हैं, लेकिन किसी की नजर इस असहाय युवक की पीड़ा पर क्यों नहीं पड़ी? आखिर एक गांव से आए युवा समाजसेवी को ही उसकी मदद के लिए आगे क्यों आना पड़ा?
मोहन विश्वकर्मा की यह संवेदनशीलता और मानवता आज समाज के लिए एक उदाहरण बन गई है। ऐसे समय में जब लोग अक्सर अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं, तब एक युवा समाजसेवी ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत अभी भी जिंदा है।

“मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, और मोहन विश्वकर्मा ने इसे अपने कार्यों से सिद्ध कर दिखाया है।”
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