06/04/2026

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करेली के PM श्री स्कूल में पुस्तक के नाम पर कॉपी मेला! अभिभावक हुए परेशान

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करेली के पीएम श्री स्कूल में ‘पुस्तक’ के नाम पर लगा ‘कॉपी मेला’? अभिभावकों ने उठाए गंभीर सवाल

📍 करेली | 🗓️ 6 अप्रैल 2026 (सोमवार)

करेली पुस्तक मेला

करेली के पीएम श्री (पूर्व शासकीय कन्या शाला) स्कूल परिसर, रेलवे स्टेशन के समीप गांधी चौक पर रविवार को आयोजित पुस्तक मेला अब सवालों के घेरे में आ गया है।
इस मेले का उद्देश्य अभिभावकों को निजी स्कूलों की पुस्तकें कम कीमत पर एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना बताया गया था, लेकिन मौके पर सामने आई स्थिति ने कई अभिभावकों को निराश कर दिया।

ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए हर साल स्कूल खुलने का समय आर्थिक दबाव लेकर आता है।
महंगी किताबें, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदना कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
ऐसे में जब पुस्तक मेले जैसे आयोजन से राहत की उम्मीद होती है, तो अधूरी व्यवस्था अभिभावकों की परेशानी और बढ़ा देती है।

📌 ‘पुस्तक मेला’ या ‘कॉपी मेला’?

मौके पर पहुंचे कई अभिभावकों का कहना है कि मेले में अपेक्षित पुस्तकें उपलब्ध नहीं थीं।
उनके अनुसार, अधिकांश स्टॉल पर केवल कॉपियां ही नजर आईं, जबकि जरूरी पाठ्य पुस्तकें सीमित मात्रा में या बिल्कुल उपलब्ध नहीं थीं।

इसी कारण स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई कि यह आयोजन “पुस्तक मेले” के बजाय “कॉपी मेले” जैसा अधिक नजर आया।

अभिभावकों का कहना है कि वे इस उम्मीद से मेले में पहुंचे थे कि उन्हें एक ही स्थान पर उचित कीमत पर सभी आवश्यक पुस्तकें मिल जाएंगी।
लेकिन जब जरूरी किताबें ही उपलब्ध नहीं रहीं, तो उन्हें दोबारा बाजार का रुख करना पड़ा, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हुई।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कई बार इस तरह के आयोजन सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाते हैं,
जबकि जमीनी स्तर पर अभिभावकों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पाती।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस तरह के आयोजन वास्तव में अपने उद्देश्य को पूरा कर पा रहे हैं या नहीं।

📞 प्रशासन को दी गई जानकारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके से ही जिला शिक्षा अधिकारी नरसिंहपुर एवं तहसीलदार करेली को वस्तु स्थिति से अवगत कराया गया।

अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में इस तरह के आयोजनों में सुधार देखने को मिलता है।

⚠️ उठते सवाल

  • क्या पुस्तक मेले का उद्देश्य सही तरीके से पूरा हुआ?
  • जरूरी पाठ्य पुस्तकें पर्याप्त मात्रा में क्यों उपलब्ध नहीं थीं?
  • क्या यह आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह गया?
  • अभिभावकों को सस्ती और सही पुस्तकें कब मिलेंगी?

फिलहाल अभिभावकों की उम्मीद प्रशासन से है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों को अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाया जाए,
ताकि वास्तव में आम लोगों को राहत मिल सके और योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर दिखाई दे।

⚖️ महत्वपूर्ण सूचना

यह समाचार स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारी एवं अभिभावकों की प्रतिक्रिया के आधार पर प्रकाशित किया गया है।
समाचार में व्यक्त तथ्य संबंधित स्रोतों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा की जानी शेष है।
यदि संबंधित पक्ष अपना स्पष्टीकरण देना चाहता है, तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

📢 रिपोर्ट: SMP24NEWS

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