22/04/2026

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नरसिंहपुर PWD (सेतु निर्माण) में “निरंक” रिकॉर्ड का मामला: निरीक्षण नहीं तो काम कैसे? सिस्टम पर बड़े सवाल

नरसिंहपुर PWD (सेतु निर्माण) में बड़ा खुलासा: SDO के रिकॉर्ड “निरंक”, बिना निरीक्षण कैसे चल रहा काम?

📍 नरसिंहपुर | बुधवार, 21 अप्रैल 2026

नरसिंहपुर जिले के लोक निर्माण विभाग (सेतु निर्माण) में सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए एक ऐसा खुलासा सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। आवेदनकर्ता को दी गई आधिकारिक जानकारी में कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड “निरंक (NIL)” बताए गए हैं।

📊 क्या है पूरा मामला?

RTI के तहत सेतु निर्माण से जुड़े कार्यों की निगरानी और निरीक्षण से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। लेकिन विभाग की ओर से जो जवाब दिया गया, उसने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

  • SDO/इंजीनियर निरीक्षण रिपोर्ट – निरंक
  • फील्ड विजिट रिकॉर्ड – निरंक
  • TA (यात्रा भत्ता) विवरण – निरंक
  • उपस्थिति / बायोमेट्रिक रिकॉर्ड – निरंक
  • दौरा कार्यक्रम – निरंक

👉 यानी जिन दस्तावेजों के आधार पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रगति तय होती है, वही रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।

⚠️ कब और कैसे सामने आया मामला?

यह जानकारी RTI आवेदन के जवाब में सामने आई, जिसमें आवेदक ने सेतु निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग और निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड की मांग की थी। विभाग द्वारा अधिकांश बिंदुओं पर “निरंक” जवाब दिया गया।

❗ सबसे बड़ा सवाल: बिना निरीक्षण कैसे चल रहा काम?

सेतु निर्माण जैसे तकनीकी और संवेदनशील कार्यों में नियमित निरीक्षण, फील्ड विजिट और दस्तावेजी रिकॉर्ड अनिवार्य होते हैं। ऐसे में यदि निरीक्षण रिपोर्ट और विजिट रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं हैं, तो यह स्थिति सामान्य नहीं मानी जा सकती।

👉 क्या बिना निरीक्षण के ही कार्यों को स्वीकृति दी जा रही है?
👉 क्या निगरानी प्रणाली पूरी तरह कमजोर हो चुकी है?
👉 या फिर रिकॉर्ड संधारित ही नहीं किए जा रहे?

🔎 जिम्मेदारी किसकी?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। यदि संबंधित अधिकारी निरीक्षण नहीं कर रहे या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, तो कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है?

⚠️ क्या होनी चाहिए कार्रवाई?

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए
  • निरीक्षण प्रणाली की समीक्षा की जानी चाहिए
  • रिकॉर्ड संधारण की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए

📌 आगे क्या?

मामले के सामने आने के बाद अब यह जरूरी हो गया है कि विभाग इस पर स्पष्ट जवाब दे। यदि रिकॉर्ड वास्तव में उपलब्ध नहीं हैं, तो यह एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानी जाएगी।

👉 यह मामला केवल एक RTI जवाब नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।


डिक्लेरेशन: यह समाचार RTI के माध्यम से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार का उद्देश्य जनहित में तथ्य प्रस्तुत करना है। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।

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