निवारी पंचायत में सरपंच के नाम भुगतान पर सवाल: क्या सरपंच खुद बन गए वेंडर?
श्रेष्ठ मध्यप्रदेश 24 न्यूज.कॉम
नरसिंहपुर जिले की जनपद पंचायत करेली अंतर्गत ग्राम पंचायत निवारी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज भुगतान रिकॉर्ड से जुड़ा हुआ है, जिसमें “SARPANCH GRAM PANCHAYAT NIWARI” के नाम से लाखों रुपये की भुगतान एंट्री दिखाई देने के बाद पूरे पंचायत तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब पंचायत दर्पण पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड में 05 दिसंबर 2025 की तारीख में SHUBH ENTERPRISES और SARPANCH GRAM PANCHAYAT NIWARI दोनों नामों से समान राशि दर्ज दिखाई दी। रिकॉर्ड सार्वजनिक होने के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर पंचायत की निर्वाचित महिला सरपंच के नाम से भुगतान क्यों दर्ज हुआ।
रिकॉर्ड देखने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या ग्राम पंचायत निवारी की निर्वाचित महिला सरपंच श्रीमती रंजना दीक्षित के नाम से भुगतान एंट्री दर्ज की गई। पंचायत वित्तीय नियमों के जानकारों का कहना है कि पंचायत निधि और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक होती है। ऐसे में यदि किसी निर्वाचित महिला सरपंच के नाम से भुगतान दर्ज दिखाई देता है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया और वित्तीय व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है।
जब पूरे मामले को लेकर जनपद पंचायत करेली के ADEO सोनेश उइके से चर्चा की गई, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
ADEO के इस बयान के बाद मामला और अधिक गंभीर माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर अब यह चर्चा हो रही है कि यदि भुगतान किसी अधिकृत सप्लायर या फर्म को किया गया था, तो फिर सरपंच के नाम से समान राशि की एंट्री किस आधार पर की गई।
पंचायतों में विकास कार्यों के लिए जारी राशि का उपयोग तय नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। भुगतान से लेकर मटेरियल सप्लाई और संबंधित प्रविष्टियों का रिकॉर्ड अलग-अलग स्तर पर दर्ज किया जाता है।
ऐसे में किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के नाम से भुगतान एंट्री दिखाई देना सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा रहा। कई ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में यह एंट्री दिखाई दे रही है, तो इसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच होना आवश्यक है।
मामले में यह भी चर्चा है कि क्या संबंधित भुगतान किसी निर्माण कार्य, सप्लाई या मटेरियल से जुड़े थे और यदि थे, तो संबंधित कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है। हालांकि अभी तक पंचायत की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
ग्राम पंचायत निवारी में महिला सरपंच होने के कारण अब पंचायत संचालन में सरपंच पति महेश दीक्षित की भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के कई मामलों में उनकी सक्रिय मौजूदगी देखी जाती रही है।
हालांकि इन चर्चाओं और आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिकॉर्ड सामने आने के बाद अब पंचायत के प्रशासनिक संचालन, निर्णय प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्राम पंचायत निवारी पहले भी मरघट बाउंड्री वॉल, जियो-टैग और निर्माण कार्यों को लेकर चर्चा में रह चुकी है। इससे पहले सामने आई रिपोर्टों में यह सवाल उठाया गया था कि लाखों रुपये खर्च दिखाए जाने के बावजूद जमीन पर निर्माण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दिया।
इसके अलावा जियो-टैग रिकॉर्ड में निवारी और नानोरी मरघट के बीच बेहद कम दूरी सामने आने के बाद भी पूरे मामले में तकनीकी सत्यापन की मांग उठी थी। अब नए भुगतान रिकॉर्ड सामने आने के बाद पंचायत की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन दोनों सवालों के घेरे में दिखाई दे रहे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंचायत दर्पण पोर्टल पर महिला सरपंच के नाम से दर्ज लाखों रुपये की एंट्री आखिर क्यों दिखाई दी। यदि यह तकनीकी गलती है, तो उसे स्पष्ट किया जाना जरूरी है और यदि मामला प्रक्रिया से जुड़ा है, तो उसकी जवाबदेही तय होना भी आवश्यक माना जा रहा है।
अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाती है।