

मुख्यालय में मंत्री और कलेक्टर, अधिकारी गायब
20 और 21 मार्च 2026 को नरसिंहपुर में स्थानीय विधायक और मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का 2-दिन का दौरा हुआ। मंत्री और कलेक्टर जिले के विकास कार्यों की समीक्षा और सरकारी बैठकों में व्यस्त थे।
इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अधिकारी – सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी और सीएमएचओ डॉ. मनीष मिश्रा – मुख्यालय से पूरी तरह अनुपस्थित रहे। उन्होंने व्यवस्थाओं को प्रभारी अधिकारियों पर छोड़ दिया, जो कि प्रोटोकॉल और जिम्मेदारी की स्पष्ट अवहेलना है। भले ही बैठक का विषय स्वास्थ्य विभाग से संबंधित नहीं था, फिर भी जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए मुख्यालय में उपस्थित रहना और प्रशासनिक कार्यक्रमों में भाग लेना अनिवार्य माना जाता है।
जिम्मेदारी प्रभारी अधिकारियों के भरोसे छोड़ना
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार – यह केवल शनिवार-इतवार नहीं, बल्कि कभी भी जबलपुर पहुंच जाते हैं।
सूत्र बताते हैं कि जिले के कर्मचारी और अधिकारी चर्चा करते हैं कि दोनों अधिकारी सरकारी समय में निजी प्रैक्टिस और जबलपुर के अन्य कामों में व्यस्त रहते हैं।
शुक्रवार-रात को जाना, सोमवार-सुबह लौटना
- शुक्रवार की शाम/रात को मुख्यालय छोड़ना
- सोमवार की सुबह लौटना
- इस दौरान व्यवस्थाओं का जिम्मा प्रभारी अधिकारियों पर छोड़ना
सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी अधिकारी को मुख्यालय छोड़ने से पहले लिखित अनुमति लेना आवश्यक है। बार-बार इसका उल्लंघन गंभीर गैर-जिम्मेदारी है।
जबलपुर कनेक्शन और निजी प्रैक्टिस
सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारी सरकारी समय में जबलपुर में रहते हुए निजी प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। यह विभागीय कामकाज और जनता की स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर डालता है।
नियम, कानून और प्रोटोकॉल उल्लंघन
- मुख्यालय में नियमित उपस्थिति अनिवार्य
- मंत्री या कलेक्टर की बैठक में उपस्थित होना कर्तव्य
- अनुपस्थिति में केवल प्रभारियों पर काम छोड़ना प्रोटोकॉल उल्लंघन है
- बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ना कानून का सीधा उल्लंघन है
प्रशासनिक चुनौती और जनता के स्वास्थ्य पर असर
मामले की शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुँच चुकी है। प्रशासन को तय करना होगा कि क्या बार-बार मुख्यालय छोड़ने और प्रभारी अधिकारियों पर काम छोड़ने पर कार्रवाई होगी।
- अस्पतालों में आपात स्थिति में त्वरित निर्णय और कार्रवाई के लिए प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति जरूरी है
- अनुपस्थिति से योजना क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग प्रभावित होती है
- जनता की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर जोखिम पैदा होता है
सवाल साफ है – क्या प्रशासन इनकी लापरवाही पर कार्रवाई करेगा या फिर पूरा सिस्टम प्रभारी अधिकारियों के भरोसे ही चलता रहेगा?





