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नरसिंहपुर में CMHO बयान पर बड़ा विवाद
दिनांक: 24 अप्रैल 2026 | शुक्रवार
मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा दिए गए एक वायरल वीडियो बयान ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह मामला अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, मीडिया की भूमिका और डॉक्टरों के व्यवहार तक फैल गया है।
CMHO के कथित बयान में कहा गया कि कुछ पत्रकार लगातार नकारात्मक खबरें प्रकाशित कर रहे हैं, जिसके कारण डॉक्टर गंभीर मरीजों को सीधे जबलपुर जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर कर रहे हैं। इस बयान के सामने आने के बाद जिले में पत्रकार समुदाय और स्वास्थ्य विभाग के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।
इस पूरे मामले में यह भी चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वास्तव में रेफरल बढ़े हैं या यह केवल एक प्रशासनिक धारणा है। कई लोग इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे मीडिया रिपोर्टिंग का प्रभाव मान रहे हैं।
इस बयान के बाद नर्मदांचल पत्रकार संघ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पूरे पत्रकार समुदाय को एक साथ जोड़कर नकारात्मक रूप से प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी व्यक्ति या पत्रकार पर कोई आरोप है तो उसका नाम सार्वजनिक रूप से बताया जाए, न कि पूरे मीडिया वर्ग को जिम्मेदार ठहराया जाए। इससे पत्रकारों की छवि पर असर पड़ता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह उचित नहीं माना जाता।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि CMHO अपने बयान पर स्पष्टीकरण दें और यदि आवश्यक हो तो सार्वजनिक रूप से माफी भी जारी करें, ताकि स्थिति सामान्य हो सके।
📢 पत्रकार संघ की प्रमुख मांगें
पत्रकार संघ ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उस पर किसी भी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह के बयान या टिप्पणियां दोबारा सामने आती हैं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संघ का कहना है कि पत्रकार केवल घटनाओं को सामने लाते हैं, लेकिन किसी भी प्रशासनिक या चिकित्सा व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। इसलिए समस्याओं का ठीकरा पत्रकारों पर फोड़ना उचित नहीं है।
🏥 स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इसी बीच पत्रकारों ने 3 वर्षीय बच्ची शुभांशी मिश्रा की मृत्यु का मुद्दा भी उठाया, जिसमें कथित तौर पर इलाज के दौरान स्थिति बिगड़ने और बाद में रेफर किए जाने की बात सामने आई है। इस मामले ने स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्रकारों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इलाज में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं। साथ ही निजी अस्पतालों की मान्यता और वहां कार्यरत स्टाफ की योग्यता की भी जांच की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चिंता देखी जा रही है और वे चाहते हैं कि जिले में स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत हों ताकि गंभीर मरीजों को बाहर न भेजना पड़े।
🏛️ ज्ञापन सौंपने वाले पत्रकार
इस ज्ञापन कार्यक्रम में कई वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे जिनमें गणेश प्रजापति, संदीप दुबे, विमल वन गायत्री, बबलू कहार, पंकज गुप्ता, सतीश दुबे, पिंटू वर्मा, ताराचंद पटेल, देवी प्रसाद, प्रीतम रजक, ललित श्रीवास्तव, संतोष दुबे, गोविन्द चौरसिया सहित विनय श्रीवास्तव शामिल रहे।
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SMP24NEWS रिपोर्ट