श्रेष्ठ मध्यप्रदेश 24 न्यूज.कॉम
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मध्य प्रदेश की मोहन कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट बैठक में ट्रांसफर पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद अब राज्य में 1 जून से 15 जून 2026 तक तबादला प्रक्रिया संचालित की जाएगी।
लंबे समय से नई तबादला नीति का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय के बाद हलचल तेज हो गई है।
नई नीति के तहत सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक संवर्ग अथवा कैडर में अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही तबादले किए जा सकेंगे। यानी किसी भी विभाग में तय सीमा से अधिक स्थानांतरण नहीं होंगे।
सरकार का फोकस इस बार नियंत्रित और व्यवस्थित तबादला प्रक्रिया पर बताया जा रहा है, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों और विभागीय संतुलन बना रहे।
नई नीति के अनुसार जिला स्तर पर होने वाले तबादलों के लिए संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री की मंजूरी आवश्यक होगी। इससे स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासनिक फेरबदल पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी रखी जाएगी।
वहीं, Class-I अधिकारियों के तबादले सीधे मुख्यमंत्री की मंजूरी से किए जाएंगे। सरकार ने उच्च अधिकारियों के स्थानांतरण पर केंद्रीकृत नियंत्रण बनाए रखने का संकेत दिया है।
सूत्रों के अनुसार नई ट्रांसफर पॉलिसी में कुछ विशेष श्रेणियों के कर्मचारियों को राहत देने की व्यवस्था भी रखी गई है। जिन कर्मचारियों को स्वास्थ्य, पारिवारिक अथवा विशेष प्रशासनिक परिस्थितियों के आधार पर स्थानांतरण की आवश्यकता है, उनके मामलों पर अलग से विचार किया जा सकता है।
हालांकि विस्तृत दिशा-निर्देश सरकार द्वारा औपचारिक आदेश जारी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होंगे।
ट्रांसफर पॉलिसी को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका असर जिलेवार प्रशासन, विभागीय संतुलन और स्थानीय कामकाज पर भी पड़ता है।
हर साल तबादला नीति लागू होने के साथ विभागों में गतिविधियां बढ़ जाती हैं। कर्मचारी अपनी पसंद के स्थानों के लिए आवेदन करते हैं, जबकि विभागीय स्तर पर रिक्त पदों और कार्य व्यवस्था को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाते हैं।
ऐसे में मोहन सरकार का यह फैसला आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब विभागीय स्तर पर तैयारियां तेज होने की संभावना है। जून की शुरुआत के साथ ही आवेदन, समीक्षा और अनुमोदन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर अब सरकार द्वारा जारी होने वाले विस्तृत दिशा-निर्देशों पर टिकी हुई है।