सागर।
शासकीय विभागों में नियुक्तियों के दौरान होने वाले चरित्र सत्यापन (Character Verification) की प्रक्रिया और दो अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक संशय सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर यह बात सामने आई है कि वर्ष 2023 में महिला कर्मचारी को आपत्तिजनक संदेश भेजने के गंभीर आरोप में नौकरी से बर्खास्त (Terminate) किए गए एक संविदा कर्मचारी को कथित तौर पर सागर वन मंडल (Sagar Forest Division) में स्थायी सरकारी नौकरी मिल गई है। हालांकि, वन विभाग में उसकी वर्तमान नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है, लेकिन एनएचएम के दस्तावेजों ने इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शासकीय विभागों में नियुक्तियों के दौरान होने वाले चरित्र सत्यापन (Character Verification) की प्रक्रिया और दो अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक संशय सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर यह बात सामने आई है कि वर्ष 2023 में महिला कर्मचारी को आपत्तिजनक संदेश भेजने के गंभीर आरोप में नौकरी से बर्खास्त (Terminate) किए गए एक संविदा कर्मचारी को कथित तौर पर सागर वन मंडल (Sagar Forest Division) में स्थायी सरकारी नौकरी मिल गई है। हालांकि, वन विभाग में उसकी वर्तमान नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है, लेकिन एनएचएम के दस्तावेजों ने इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं।
महिला सुरक्षा और शासकीय चरित्र सत्यापन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरटीआई (RTI) से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, महिला उत्पीड़न के गंभीर मामले में पूर्व में बर्खास्त कर्मचारी को सरकारी नौकरी मिलने की एक संदेहास्पद जानकारी सामने आई है। पुख्ता सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2023 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) से सेवा से पृथक किए गए एक संविदा कर्मी को कथित तौर पर सागर वन मंडल (Sagar Forest Division) में स्थायी शासकीय पद पर नियुक्ति मिल गई है।
विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट में क्या था?
प्राप्त आरटीआई दस्तावेजों के मुताबिक, यह मूल मामला वर्ष 2023 का है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित एक शासकीय कार्यालय में कार्यरत महिला कर्मचारी ने अपने ही सहकर्मी (संविदा कर्मचारी) के खिलाफ व्हाट्सएप पर अत्यंत आपत्तिजनक, अमर्यादित और अश्लील संदेश भेजने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग द्वारा तत्काल तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया था।
जांच समिति के समक्ष दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए गए थे। उपलब्ध आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने जांच समिति के सामने लिखित रूप से यह स्वीकार किया था कि उसने नशे की हालत में महिला कर्मचारी को वे आपत्तिजनक संदेश भेजे थे। जांच समिति ने कर्मचारी को कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न और गंभीर कदाचार (Misconduct) का दोषी पाया और उसके खिलाफ सेवा समाप्ति की कड़ी अनुशंसा की थी। इसके बाद, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश जारी कर उक्त कर्मचारी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मानव संसाधन नियमावली के तहत दोषी मानते हुए सेवा से तत्काल पृथक (Terminate) कर दिया गया था।
पुख्ता सूत्रों के हवाले से वन विभाग की नियुक्ति पर संशय
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पुख्ता सूत्रों से यह जानकारी सामने आई कि एनएचएम से निष्कासित होने के बाद उक्त व्यक्ति ने वन विभाग की भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण की और वर्तमान में वह कथित तौर पर सागर वन मंडल में एक स्थायी शासकीय पद पर कार्यरत है।
प्रशासनिक मामलों के जानकारों के अनुसार, यदि सूत्रों से मिली इस जानकारी में सत्यता है, तो इसके पीछे दो मुख्य तकनीकी कारण हो सकते हैं, जिसने इस प्रक्रिया को संभव बनाया:
- पुलिस रिकॉर्ड में मामला दर्ज न होना: महिला उत्पीड़न के इस गंभीर मामले में तत्कालीन विभाग द्वारा सेवा समाप्ति की कड़ी कार्रवाई तो की गई, लेकिन पुलिस में कोई औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई गई थी। इस वजह से स्थानीय पुलिस के क्रिमिनल रिकॉर्ड में उस व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं हुआ और पुलिस चरित्र सत्यापन (Police Verification) के दौरान नए विभाग को इसकी भनक नहीं लग सकी।
- केंद्रीयकृत डेटाबेस की कमी: वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में एक सरकारी महकमे (जैसे स्वास्थ्य विभाग) द्वारा कदाचार के आरोप में हटाए गए संविदा कर्मचारियों का कोई साझा डिजिटल डेटाबेस नहीं होता है। इस कारण जब दूसरे विभाग (जैसे वन विभाग) में भर्ती प्रक्रिया आयोजित होती है, तो वहां के प्रशासन के पास उम्मीदवार के पिछले सेवा इतिहास को स्वतः जानने का कोई जरिया नहीं होता।
तथ्यों को छुपाने (Suppression of Facts) का कानूनी पहलू
मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के अंतर्गत, किसी भी शासकीय विभाग में स्थायी नियुक्ति से पहले प्रत्येक उम्मीदवार को एक विस्तृत चरित्र और पूर्व सेवा घोषणा पत्र (Attestation Form) के साथ एक शपथ पत्र (Affidavit) देना अनिवार्य होता है। इस प्रपत्र में स्पष्ट रूप से पूछा जाता है कि ‘क्या आपको कभी किसी पूर्व सेवा, निजी या शासकीय नौकरी से हटाया, बर्खास्त या पृथक किया गया है?’
चूंकि अभी वन विभाग से इस संबंध में आधिकारिक आरटीआई जानकारी प्राप्त होना बाकी है, इसलिए यह जांच का विषय है कि संबंधित कर्मचारी ने सागर वन मंडल में कार्यभार ग्रहण करते समय अपनी इस पूर्व बर्खास्तगी की जानकारी को विभाग के साथ साझा किया था या नहीं। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि कर्मचारी ने अपनी पूर्व सेवा और बर्खास्तगी की सच्चाई को छुपाया है, तो यह स्थापित नियमों के तहत ‘तथ्यों को छुपाने’ (Suppression of Facts) का गंभीर मामला बनता है। प्रशासनिक और कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार गलत जानकारी देकर या सत्य छुपाकर शासकीय नौकरी प्राप्त करता है, तो जानकारी प्रमाणित होने पर उसकी सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा सकता है।
आगामी प्रशासनिक कदम और जांच की मांग
इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद अब यह तकनीकी सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या इन पुख्ता एनएचएम दस्तावेजों के आधार पर सागर वन मंडल अधिकारी (DFO) संबंधित कर्मचारी के नियुक्ति दस्तावेजों और पूर्व सेवा के शपथ पत्र की आंतरिक जांच (Internal Re-verification) करवाएंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की पूरी सच्चाई तभी सामने आ सकेगी जब वन विभाग से आरटीआई के माध्यम से या सीधे शिकायत कर कर्मचारी के चरित्र घोषणा पत्र की प्रति मांगी जाए। यदि शपथ पत्र में दी गई जानकारियां झूठी पाई जाती हैं, तो नियमानुसार संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति की वैधता समाप्त हो सकती है।
⚖️ डिस्क्लेमर: यह समाचार पूरी तरह से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) से प्राप्त आरटीआई दस्तावेजों, कार्यालयीन अभिलेखों और स्थापित प्रशासनिक नियमों पर आधारित है। वन विभाग में संबंधित व्यक्ति की नियुक्ति की खबरों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है। किसी भी व्यक्ति को बिना अदालती या आधिकारिक प्रक्रिया के दोषी घोषित करना इस समाचार का उद्देश्य नहीं है। इस मामले में सागर वन मंडल या संबंधित पक्ष का आधिकारिक रुख या स्पष्टीकरण सामने आने पर उसे भी नियमतः स्थान दिया जाएगा।





