जब भी दिव्यांगजनों के अधिकारों की बात होती है, अधिकांश लोगों के मन में सबसे पहले रैंप, व्हीलचेयर या लिफ्ट जैसी सुविधाएँ आती हैं। लेकिन क्या केवल सीढ़ियाँ होना ही “Barrier (बाधा)” है? क्या किसी दिव्यांग व्यक्ति को पाँच बार सरकारी कार्यालय बुलाना भी एक बाधा है? क्या वेबसाइट का स्क्रीन रीडर से न चलना भी Barrier है?
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) स्पष्ट रूप से बताता है कि बाधा केवल ईंट-पत्थर की नहीं होती, बल्कि सोच, सूचना, संचार और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ भी दिव्यांगजनों के लिए बड़ी बाधा बन सकती हैं।
इसीलिए इस कानून का उद्देश्य केवल रैंप बनवाना नहीं, बल्कि हर प्रकार की बाधा को हटाकर समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना है।
1. “Barrier (बाधा)” की कानूनी परिभाषा
RPwD Act, 2016 की धारा 2 में “Barrier” का अर्थ ऐसी किसी भी रुकावट, अवरोध, स्थिति, व्यवस्था, व्यवहार या प्रक्रिया से है जो किसी दिव्यांग व्यक्ति को समाज में समान रूप से भाग लेने से रोकती है।
अर्थात यदि कोई व्यक्ति केवल अपनी दिव्यांगता के कारण किसी सेवा, भवन, सूचना, शिक्षा, रोजगार या सरकारी सुविधा तक नहीं पहुँच पा रहा है, तो वह स्थिति भी एक “Barrier” है।
2. Barrier के प्रमुख प्रकार
(1) Physical Barrier (भौतिक बाधा)
यह सबसे सामान्य प्रकार की बाधा है।
उदाहरण—
- सरकारी भवन में रैंप नहीं होना।
- लिफ्ट का अभाव।
- रेलिंग नहीं होना।
- व्हीलचेयर उपलब्ध नहीं होना।
- दिव्यांग-अनुकूल शौचालय का अभाव।
- संकरी सीढ़ियाँ।
- ऊँचे काउंटर।
यदि कोई व्यक्ति केवल इसलिए कार्यालय में प्रवेश नहीं कर पाता क्योंकि भवन सुलभ नहीं है, तो यह Physical Barrier है।

(2) Communication Barrier (संचार संबंधी बाधा)
हर व्यक्ति एक ही तरीके से संवाद नहीं कर सकता।
यदि—
- सांकेतिक भाषा (Sign Language) उपलब्ध न हो।
- ब्रेल सूचना न हो।
- ऑडियो घोषणा न हो।
- श्रवण बाधित व्यक्ति के लिए Interpreter न हो।
तो दिव्यांग व्यक्ति सूचना प्राप्त ही नहीं कर पाएगा।
यही Communication Barrier कहलाती है।
(3) Information Barrier (सूचना संबंधी बाधा)
आज अधिकांश सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन हैं।
लेकिन यदि—
- वेबसाइट स्क्रीन रीडर से नहीं चलती।
- आवेदन फॉर्म सुलभ नहीं है।
- PDF पढ़ी नहीं जा सकती।
- Captcha का विकल्प नहीं है।
- मोबाइल ऐप Accessibility Standards का पालन नहीं करती।
तो यह Information Barrier है।
डिजिटल इंडिया तभी सफल होगा जब डिजिटल सेवाएँ सभी के लिए समान रूप से सुलभ हों।
(4) Attitudinal Barrier (मानसिक या व्यवहारिक बाधा)
कई बार सबसे बड़ी बाधा भवन नहीं, बल्कि लोगों की सोच होती है।
उदाहरण—
- “आप बाद में आइए।”
- “यह काम नहीं होगा।”
- “दिव्यांग व्यक्ति यह नहीं कर सकता।”
- आवेदन को गंभीरता से न लेना।
- दिव्यांग व्यक्ति को सक्षम न समझना।
ऐसी मानसिकता दिव्यांगजनों के अधिकारों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है।
(5) Administrative Barrier (प्रशासनिक बाधा)
यही वह विषय है जिस पर सबसे कम चर्चा होती है, जबकि व्यवहार में दिव्यांगजन सबसे अधिक इसी समस्या का सामना करते हैं।
प्रशासनिक बाधा तब होती है जब नियम, प्रक्रिया या कार्यालयीय कार्यवाही इतनी जटिल बना दी जाए कि दिव्यांग व्यक्ति अपने अधिकारों का लाभ ही न ले सके।
उदाहरण
- प्रमाणपत्र के लिए 4–5 बार जिला अस्पताल बुलाना।
- अलग-अलग डॉक्टरों के पास बार-बार भेजना।
- पेंशन महीनों तक लंबित रखना।
- UDID प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल बना देना।
- एक ही दस्तावेज़ बार-बार माँगना।
- आवेदन की स्थिति की जानकारी न देना।
- बिना कारण फाइल रोक देना।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि यहाँ भवन पूरी तरह सुलभ हो सकता है, फिर भी यदि प्रक्रिया ही बाधा बन जाए, तो वह भी RPwD Act की भावना के विपरीत है।
इसलिए यह समझना आवश्यक है कि Barrier केवल सीढ़ियाँ नहीं होती, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया भी एक बड़ी बाधा हो सकती है।
3. वास्तविक जीवन के उदाहरण
देशभर में अनेक स्थानों पर आज भी विभिन्न प्रकार की बाधाएँ देखने को मिलती हैं।
जैसे—
- कलेक्ट्रेट में रैंप नहीं होना।
- जिला अस्पताल में दिव्यांग व्यक्ति को कई बार चक्कर लगाना।
- रेलवे स्टेशन पर व्हीलचेयर उपलब्ध न होना।
- निजी अस्पताल में प्रवेश हेतु रैंप का अभाव।
- मॉल में दिव्यांग-अनुकूल शौचालय न होना।
- विद्यालय में CWSN (Children With Special Needs) के लिए आवश्यक व्यवस्था न होना।
- सरकारी वेबसाइट का स्क्रीन रीडर से उपयोग न हो पाना।
ये सभी अलग-अलग प्रकार की Barriers हैं।
4. Barrier हटाने की जिम्मेदारी किसकी है?
RPwD Act केवल समस्या नहीं बताता, बल्कि जिम्मेदारी भी तय करता है।
मुख्य जिम्मेदार संस्थाएँ हैं—
- Appropriate Government
- Local Authority
- Government Establishments
- Private Establishments (जहाँ अधिनियम लागू होता है)
- शैक्षणिक संस्थान
- सार्वजनिक उपयोग वाले भवन
- सेवा प्रदाता संस्थाएँ
इन सभी का दायित्व है कि वे अपने परिसर, सेवाओं, प्रक्रियाओं और सूचना तंत्र को दिव्यांगजनों के लिए सुलभ बनाएँ।
5. यदि Barrier हो तो शिकायत कहाँ करें?
यदि किसी दिव्यांग व्यक्ति को किसी प्रकार की बाधा का सामना करना पड़ता है, तो वह—
- संबंधित विभाग के प्रमुख अधिकारी को लिखित शिकायत कर सकता है।
- जिला स्तर के सक्षम प्राधिकारी से संपर्क कर सकता है।
- राज्य दिव्यांगजन आयुक्त (State Commissioner for Persons with Disabilities) के समक्ष शिकायत कर सकता है।
- आवश्यक होने पर मुख्य आयुक्त (Chief Commissioner for Persons with Disabilities) के समक्ष भी प्रकरण प्रस्तुत किया जा सकता है।
- न्यायिक उपाय भी उपलब्ध हैं, यदि अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो।
6. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या केवल रैंप न होना ही Barrier है?
उत्तर: नहीं। सूचना, संचार, व्यवहार और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ भी Barrier हो सकती हैं।
प्रश्न 2: क्या वेबसाइट का Accessible न होना भी Barrier है?
उत्तर: हाँ।
प्रश्न 3: क्या बार-बार दस्तावेज़ माँगना प्रशासनिक बाधा है?
उत्तर: यदि यह अनावश्यक और अधिकार प्राप्ति में रुकावट बन रहा है, तो इसे प्रशासनिक बाधा माना जा सकता है।
प्रश्न 4: क्या निजी संस्थानों पर भी यह कानून लागू होता है?
उत्तर: जहाँ अधिनियम लागू होता है, वहाँ निजी संस्थानों पर भी सुलभता संबंधी दायित्व लागू हो सकते हैं।
प्रश्न 5: क्या अस्पताल में व्हीलचेयर न होना भी Barrier है?
उत्तर: हाँ, यह Physical Barrier का उदाहरण हो सकता है।
प्रश्न 6: क्या Sign Language की सुविधा आवश्यक है?
उत्तर: जहाँ आवश्यक हो, संचार की सुलभ व्यवस्था करना महत्वपूर्ण दायित्व है।
प्रश्न 7: क्या दिव्यांग व्यक्ति को बार-बार कार्यालय बुलाना उचित है?
उत्तर: यदि बिना उचित कारण ऐसा किया जाता है और इससे अधिकार प्राप्ति बाधित होती है, तो यह प्रशासनिक बाधा का उदाहरण हो सकता है।
प्रश्न 8: क्या विद्यालयों में भी Barrier हटाना आवश्यक है?
उत्तर: हाँ, समावेशी शिक्षा के लिए यह आवश्यक है।
प्रश्न 9: क्या डिजिटल सेवाएँ भी सुलभ होनी चाहिए?
उत्तर: बिल्कुल, डिजिटल पहुँच भी समान अधिकार का हिस्सा है।
प्रश्न 10: इस कानून का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: दिव्यांगजनों को समान अवसर, सम्मान, स्वतंत्रता और बिना किसी बाधा के समाज में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करना।
निष्कर्ष
Barrier केवल सीढ़ियाँ नहीं होती। एक कठिन सरकारी प्रक्रिया, अनुपलब्ध सूचना, असंवेदनशील व्यवहार, असुलभ वेबसाइट या बार-बार कार्यालय के चक्कर लगवाना भी दिव्यांग व्यक्ति के अधिकारों में बाधा बन सकता है।
RPwD Act, 2016 का वास्तविक संदेश यही है कि समाज, सरकार और संस्थाएँ मिलकर हर प्रकार की बाधा को समाप्त करें, ताकि दिव्यांगजन दया के नहीं, बल्कि अधिकार, समानता और गरिमा के आधार पर जीवन जी सकें।
🔗 यह भी पढ़ें (Related News)
RPwD Act, 2016 क्यों लाया गया?
क्या 1995 का कानून पर्याप्त नहीं था?
भारत ने UNCRPD को स्वीकार करने के बाद नया कानून क्यों बनाया?
क्या यह केवल पेंशन और आरक्षण का कानून है या दिव्यांगजनों के अधिकारों की गारंटी?
इन सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों का सरल और कानूनी विश्लेषण इस लेख में पढ़ें।
👉 पूरा लेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
🔗 https://smp24news.com/rpwd-act-2016-kyon-laya-gaya/





