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नरसिंहपुर गुदरी बाजार में सांड के आतंक के खिलाफ पशुवाहन में कांग्रेस पार्षदों का प्रदर्शन

कांग्रेस पार्षद पशुवाहन में कैद, सांडों को शहर से बाहर करने की मांग

23 अगस्त को गुदरी बाजार में बेकाबू सांड ने मचाया आतंक, 20-25 वाहन गिराने और 8-10 लोगों को घायल करने की सूचना; 24 अगस्त को कांग्रेस पार्षद दल ने किया अनोखा प्रदर्श

नरसिंहपुर। शहर में आवारा पशुओं, विशेषकर सांडों के बढ़ते आतंक ने अब नगरवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंदेली क्षेत्र के गुदरी बाजार में 23 अगस्त की रात एक बेकाबू सांड ने करीब आधे घंटे तक जमकर आतंक मचाया। घटना के दौरान बाजार में अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांड ने सड़क पर खड़े दोपहिया एवं अन्य वाहनों को टक्कर मारकर गिरा दिया तथा कई लोगों को चोटें आईं।

पूर्व पार्षद राजा ओसवाल के अनुसार, सांड ने करीब 20 से 25 गाड़ियों को गिरा दिया, जबकि 8 से 10 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से गुदरी बाजार में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।

बताया गया कि घटना की सूचना नगर पालिका एवं संबंधित विभाग को दी गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार काफी समय तक जिम्मेदार अमला मौके पर नहीं पहुंचा। इसको लेकर लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।

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घटना ने खड़े किए आवारा पशुओं और कचरा प्रबंधन पर सवाल

गुदरी बाजार की घटना ने शहर में लंबे समय से चली आ रही आवारा पशुओं की समस्या को फिर से सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के बाजारों और सड़कों पर आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। खुले में पड़ा कचरा और खाद्य सामग्री इन पशुओं को बाजार क्षेत्रों की ओर आकर्षित करती है।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा पशुओं और विशेषकर आक्रामक सांडों को नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में इससे भी गंभीर हादसा हो सकता है। नागरिकों ने नगर पालिका से नियमित रूप से आवारा पशुओं को पकड़ने तथा कचरा प्रबंधन व्यवस्था को व्यवस्थित करने की मांग की है।

24 अगस्त को कांग्रेस पार्षद दल ने खोला मोर्चा

23 अगस्त की घटना के अगले ही दिन, 24 अगस्त को कांग्रेस पार्षद दल ने नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस पार्षदों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र सौंपकर शहर में बढ़ते सांडों के आतंक और कचरा प्रबंधन की समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

पार्षदों ने अपने पत्र में कहा कि सांडों का आतंक इस स्तर तक बढ़ चुका है कि नगरवासियों की जान पर बन आई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि शहर में घूम रहे आवारा एवं आक्रामक सांडों को जल्द से जल्द पकड़कर शहर से बाहर किया जाए तथा खुले में कचरा फेंके जाने की व्यवस्था पर भी प्रभावी रोक लगाई जाए।

‘सांडों को शहर से बाहर करो, नहीं तो हमें कर दो’

कांग्रेस पार्षदों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नगर पालिका आवारा सांडों को शहर से बाहर करने में असमर्थ है तो “सांडों को शहर से बाहर करो, नहीं तो हम कांग्रेस के पार्षदों को ही पशुवाहन में बंद करके शहर से बाहर कर दो।”

इसी संदेश को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने सांकेतिक रूप से स्वयं को पशुवाहन में कैद कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्षदों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि जब सड़क पर घूम रहे सांडों को पकड़ने के लिए पशुवाहन उपलब्ध है, तो फिर इन पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में नगर पालिका की कार्रवाई इतनी धीमी क्यों है।

पार्षद आनंद चौरसिया पूरी टीम के साथ पहुंचे

इस बीच कांग्रेस पार्षद आनंद चौरसिया अपनी पूरी टीम के साथ सक्रिय हुए और 23 अगस्त को आतंक मचाने वाले सांड को पकड़वाने की कार्रवाई कराई। सांड के पकड़े जाने के बाद बाजार क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली।

हालांकि कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि एक सांड को पकड़ लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। शहर में बड़ी संख्या में घूम रहे आवारा पशुओं को लेकर नगर पालिका को व्यापक अभियान चलाना होगा। साथ ही पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान, नियमित पकड़ने की व्यवस्था और कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

‘जनता की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

कांग्रेस पार्षद दल ने स्पष्ट किया कि नगर के जनमानस के जीवन के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्षदों ने कहा कि नगर पालिका को केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में आवारा पशु न पहुंचें।

गुदरी बाजार की 23 अगस्त की घटना और उसके बाद 24 अगस्त को कांग्रेस पार्षदों द्वारा किया गया सांकेतिक प्रदर्शन अब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर जहां सांड को पकड़ लिए जाने से तत्काल राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने नरसिंहपुर में आवारा पशु नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब देखना यह होगा कि नगर पालिका प्रशासन कांग्रेस पार्षदों की मांग और नगरवासियों की चिंता को कितनी गंभीरता से लेते हुए आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।

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