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नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नत कर्मचारियों की मलाईदार कुर्सी और CMHO सिविल सर्जन स्तर पर कार्रवाई

EXCLUSIVE FOLLOW-UP | पदोन्नत कर्मचारियों को अब छोड़नी होगी ‘मलाईदार कुर्सी’! CMHO–सिविल सर्जन स्तर पर कार्रवाई की जानकारी

नई पदस्थापना पर भेजने की तैयारी? पुख्ता सूत्रों के अनुसार 5 दिन की समय-सीमा की जानकारी, आदेश की प्रति अभी सामने आना बाकी

नरसिंहपुर। स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नति के बाद कर्मचारियों की नई पदस्थापना, प्रभार और पुरानी सीटों पर काम करने को लेकर SMP24NEWS द्वारा प्रकाशित पिछली खबर के बाद अब मामले में नया अपडेट सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पुख्ता सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पदोन्नत कर्मचारियों को उनकी पुरानी सीटों से कार्यमुक्त कर नई पदस्थापना पर भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों को नई पदस्थापना पर जाने के लिए 5 दिन की समय-सीमा दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि समाचार तैयार किए जाने तक कार्यमुक्ति आदेश की प्रति SMP24NEWS के पास उपलब्ध नहीं है। इसलिए आदेश का क्रमांक, तारीख और उसमें दर्ज वास्तविक निर्देशों की स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि अभी बाकी है।

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EXCLUSIVE | CMHO–सिविल सर्जन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पदोन्नत कर्मचारियों को अब तक क्यों नहीं दिए प्रभार?

क्या अब छोड़नी होगी ‘मलाईदार कुर्सी’?

पदोन्नति के बाद भी कुछ कर्मचारियों के पुरानी और महत्वपूर्ण सीटों पर बने रहने को लेकर SMP24NEWS ने पहले सवाल उठाए थे। अब सूत्रों से मिली नई जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या संबंधित कर्मचारियों को अब वास्तव में पुरानी सीटों से हटाकर उनकी नई पदस्थापना पर भेजा जाएगा।

यदि सूत्रों की जानकारी सही साबित होती है, तो इसका मतलब होगा कि पदोन्नति के बाद पुरानी सीटों पर बने रहने को लेकर उठे सवालों के बाद विभागीय स्तर पर स्थिति को बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

इसी को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल है—क्या पदोन्नत कर्मचारियों को अपनी पुरानी ‘मलाईदार कुर्सी’ छोड़कर नई पदस्थापना पर जाना ही होगा?

5 दिन की समय-सीमा की जानकारी

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पुख्ता सूत्रों के अनुसार, संबंधित पदोन्नत कर्मचारियों को नई पदस्थापना पर जाने के लिए पांच दिन की समय-सीमा दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

यदि यह जानकारी आधिकारिक आदेश से पुष्ट होती है, तो आने वाले दिनों में संबंधित कर्मचारियों को नई पदस्थापना वाले कार्यालयों में कार्यभार ग्रहण करना होगा।

हालांकि, SMP24NEWS स्पष्ट करता है कि 5 दिन की समय-सीमा की जानकारी फिलहाल सूत्रों के आधार पर है। संबंधित आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद ही इसकी आधिकारिक पुष्टि की जा सकेगी।

पिछली खबर में उठाया था प्रभार और कार्यमुक्ति का सवाल

SMP24NEWS ने इससे पहले पदोन्नति के बाद कर्मचारियों को नई पदस्थापना पर प्रभार नहीं मिलने और पुराने कार्यालयों में कार्य करने की स्थिति को लेकर विस्तृत खबर प्रकाशित की थी।

उस रिपोर्ट में सवाल उठाया गया था कि यदि कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद नई पदस्थापना हो चुकी है और उन्होंने वहां जॉइनिंग भी कर दी है, तो उन्हें नई जगह का प्रभार क्यों नहीं दिया गया? साथ ही यह भी सवाल था कि उन्हें पुराने कार्यालयों से कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया।

किन कर्मचारियों की पदस्थापना बदली?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार शरद रघुवंशी, दिनेश पटेल तथा दो महिला कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद पदस्थापना CMHO कार्यालय से सिविल सर्जन कार्यालय की ओर किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

वहीं मुकेश श्रीवास्तव को सिविल सर्जन कार्यालय से CMHO कार्यालय में पदस्थ किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

दो महिला कर्मचारियों में से एक की पदस्थापना मलेरिया कार्यालय तथा दूसरी की सिविल सर्जन कार्यालय में किए जाने की जानकारी है। उनकी निजता को ध्यान में रखते हुए SMP24NEWS द्वारा उनके नाम प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं।

CMHO और सिविल सर्जन की भूमिका भी महत्वपूर्ण

मामला केवल कर्मचारियों की पुरानी सीट और नई पदस्थापना तक सीमित नहीं है। अब यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि CMHO डॉ. मनीष मिश्रा और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजकुमार चौधरी के स्तर पर इस स्थिति को लेकर क्या कार्रवाई की गई।

यदि पदोन्नत कर्मचारियों को नई पदस्थापना पर भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, तो यह जानना जरूरी है कि उन्हें किस आदेश के तहत कार्यमुक्त किया जा रहा है और नई जगह कार्यभार ग्रहण कराने की प्रक्रिया किस स्तर पर है।

साथ ही यह भी सवाल है कि यदि पहले कर्मचारियों को पुरानी सीटों पर काम करने दिया जा रहा था, तो क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक आदेश या अनुमति थी?

संरक्षण के आरोपों के बीच कार्रवाई की चर्चा

पिछली रिपोर्ट के बाद इस मामले में यह आरोप भी सामने आया था कि कुछ कर्मचारियों को अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण वे पदोन्नति के बाद भी पुरानी महत्वपूर्ण सीटों पर बने हुए हैं।

SMP24NEWS इन आरोपों को अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहा है। अधिकारियों का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण है। इसी कारण CMHO डॉ. मनीष मिश्रा और सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी से WhatsApp के माध्यम से सवाल भेजकर उनका पक्ष मांगा गया था।

अधिकारियों से पूछा गया था कि पदोन्नत कर्मचारियों की नई पदस्थापना के बावजूद प्रभार और कार्यमुक्ति की स्थिति क्या है तथा पुरानी सीटों पर कार्य करने की अनुमति किस आधार पर दी गई थी।

समाचार तैयार किए जाने तक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ था।

अब आगे क्या होगा?

यदि सूत्रों से मिली पांच दिन की समय-सीमा वाली जानकारी सही है, तो आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि संबंधित कर्मचारी अपनी पुरानी सीटों से कार्यमुक्त होकर नई पदस्थापना पर जाते हैं या नहीं।

इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या नई पदस्थापना वाले कार्यालयों में उन्हें विधिवत प्रभार दिया जाता है।

दस्तावेज सामने आने का इंतजार

SMP24NEWS इस मामले में पदोन्नति आदेश, पदस्थापना, जॉइनिंग, कार्यमुक्ति और प्रभार से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर आगे की पड़ताल जारी रखेगा।

कार्य#मुक्ति आदेश की प्रति उपलब्ध होने या CMHO–सिविल सर्जन की ओर से आधिकारिक जवाब प्राप्त होने पर खबर को उसी के अनुसार अपडेट किया जाएगा।

संपादकीय टिप्पणी

यह Follow-up रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग से जुड़े पुख्ता सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। कार्यमुक्ति आदेश की प्रति समाचार प्रकाशित किए जाने तक SMP24NEWS के पास उपलब्ध नहीं है। इसलिए पांच दिन की समय-सीमा और कार्रवाई संबंधी जानकारी को फिलहाल सूत्रों की जानकारी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों अथवा कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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