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RTI दस्तावेजों के आधार पर सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस, प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर विशेष खोजी रिपोर्ट।

RTI में अनुमति नहीं, कार्रवाई नहीं… अब बड़ा सवाल—सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस की निगरानी कौन करता है?

नरसिंहपुर। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त एक लिखित उत्तर ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जिला चिकित्सालय में पदस्थ एक सरकारी चिकित्सक के संबंध में सिविल सर्जन कार्यालय ने लिखित रूप से स्पष्ट किया है कि “इस कार्यालय द्वारा संबंधित चिकित्सक को निजी अस्पताल अथवा निजी क्लीनिक में चिकित्सा प्रैक्टिस करने की अनुमति प्रदान नहीं की गई है।”

इस उत्तर के सामने आने के बाद अब चर्चा केवल इस बात तक सीमित नहीं रह गई कि अनुमति थी या नहीं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि किसी सरकारी चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी गई थी, तो नियमों के पालन की निगरानी कौन करता है? क्या संबंधित अधिकारियों की यह प्रशासनिक और नैतिक जिम्मेदारी नहीं है कि वे सुनिश्चित करें कि सरकारी सेवा में कार्यरत चिकित्सक सेवा नियमों का पालन करें?

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RTI में क्या मांगी गई थी जानकारी?

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर यह जानकारी मांगी गई थी कि क्या संबंधित सरकारी चिकित्सक को शासकीय सेवा में रहते हुए किसी निजी अस्पताल अथवा निजी क्लीनिक में चिकित्सा प्रैक्टिस करने की अनुमति प्रदान की गई है।

सिविल सर्जन कार्यालय ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट रूप से कहा—

“इस कार्यालय द्वारा संबंधित चिकित्सक को निजी अस्पताल/निजी क्लीनिक में चिकित्सा प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी गई है।”

यह उत्तर विभाग के आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है और इसी कारण यह प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाता है।


सिविल सर्जन ने क्या कहा?

इस विषय पर चर्चा के दौरान सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि जिला अस्पताल के बाहर होने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई करना उनका कार्य नहीं है तथा यह अधिकार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के पास है।

यह बयान अपने आप में एक नया प्रश्न खड़ा करता है।

यदि कार्रवाई का अधिकार CMHO के पास था, तो क्या संबंधित मामले की जानकारी CMHO कार्यालय को भेजी गई? क्या कोई प्रतिवेदन, अनुशंसा या विभागीय पत्राचार किया गया? इस संबंध में कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।


सबसे बड़ा सवाल—क्या शिकायत मिलने के बाद ही होगी कार्रवाई?

यहीं से यह मामला एक व्यक्ति से आगे बढ़कर पूरे प्रशासनिक तंत्र का विषय बन जाता है।

यदि किसी सरकारी चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी गई है और संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में इस प्रकार की जानकारी आती है, तो क्या विभाग केवल शिकायत मिलने का इंतजार करेगा?

या फिर सरकारी सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की नियमित प्रशासनिक जिम्मेदारी भी है?

सार्वजनिक प्रशासन का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं होता, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी होता है।


क्या अधिकारियों की नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है?

सरकारी पद केवल अधिकार नहीं देता, बल्कि जिम्मेदारी भी देता है।

यदि किसी अधिकारी के संज्ञान में संभावित नियम उल्लंघन की जानकारी आती है, तो सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था यह अपेक्षा करती है कि वह तथ्यों का परीक्षण कर आवश्यक होने पर सक्षम अधिकारी को सूचित करे।

ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है—

क्या सरकारी डॉक्टरों द्वारा सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है?

यदि व्यवस्था केवल शिकायतों पर आधारित होगी, तो कई मामलों में संभावित अनियमितताएं वर्षों तक सामने ही नहीं आएंगी।


निगरानी व्यवस्था आखिर कैसे काम करती है?

यह मामला एक व्यापक सार्वजनिक प्रश्न भी खड़ा करता है।

आखिर सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस की निगरानी किस प्रकार की जाती है?

क्या—

  • नियमित निरीक्षण होते हैं?
  • शिकायतों का अलग रिकॉर्ड रखा जाता है?
  • विभाग समय-समय पर सत्यापन करता है?
  • किसी शिकायत पर जांच कितने समय में प्रारंभ होती है?
  • यदि किसी अधिकारी के संज्ञान में जानकारी आए तो क्या वह स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर जांच प्रारंभ कर सकता है?

इन प्रश्नों के उत्तर जनता के सामने आना आवश्यक हैं।


केवल अनुमति न होना पर्याप्त नहीं

यदि किसी चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी गई, तो यह केवल पहला तथ्य है।

दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या उस नियम का पालन भी सुनिश्चित किया गया?

किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में नियम बनाना जितना आवश्यक है, उनका पालन कराना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।


क्या पूरे प्रदेश में ऐसा तंत्र प्रभावी है?

यह विषय केवल नरसिंहपुर तक सीमित नहीं है।

यदि किसी जिले में सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस को लेकर शिकायतें आती हैं, तो जनता यह भी जानना चाहती है—

  • पिछले पांच वर्षों में ऐसे कितने मामलों की जांच हुई?
  • कितने मामलों में विभागीय कार्रवाई हुई?
  • कितने मामलों में आरोप सही पाए गए?
  • कितने मामलों में शिकायतें निराधार साबित हुईं?
  • क्या इस संबंध में कोई सार्वजनिक डेटा उपलब्ध है?

यदि ऐसी जानकारी सार्वजनिक की जाए, तो स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता का विश्वास दोनों मजबूत होंगे।


पारदर्शिता से ही बढ़ेगा विश्वास

सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।

ऐसे में यह आवश्यक है कि सरकारी सेवा से जुड़े नियमों का पालन पारदर्शी तरीके से हो।

यदि किसी प्रकार की शिकायत आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच हो और यदि शिकायत गलत हो तो संबंधित चिकित्सक को भी सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट मिले।

पारदर्शिता केवल कार्रवाई करने का नाम नहीं, बल्कि सही तथ्यों को सामने लाने का माध्यम भी है।


सार्वजनिक हित का विषय

यह समाचार किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने के उद्देश्य से प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।

इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल यह महत्वपूर्ण सार्वजनिक प्रश्न उठाना है कि—

यदि किसी सरकारी चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी गई थी, तो नियमों के पालन की निगरानी कौन करता है?

और यदि संभावित नियम उल्लंघन की जानकारी अधिकारियों के संज्ञान में आती है, तो क्या प्रशासन को शिकायत का इंतजार करना चाहिए या फिर वह स्वयं भी नियमों के पालन की समीक्षा कर सकता है?


निष्कर्ष

RTI के एक लिखित उत्तर ने स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

यदि अनुमति नहीं थी—

  • तो निगरानी किसने की?
  • यदि शिकायतें थीं तो उनका परीक्षण किसने किया?
  • यदि कार्रवाई का अधिकार किसी अन्य अधिकारी के पास था, तो क्या संबंधित जानकारी उसे भेजी गई?
  • और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या सरकारी सेवा में नियमों का पालन सुनिश्चित करना केवल शिकायत पर निर्भर होना चाहिए, या यह संबंधित अधिकारियों की नियमित प्रशासनिक एवं नैतिक जिम्मेदारी भी है?

इन प्रश्नों के उत्तर केवल इस एक मामले के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।


📌 SMP24NEWS Investigation

यह विशेष खोजी रिपोर्ट SMP24NEWS.COM द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों, उपलब्ध अभिलेखों तथा संबंधित अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।

इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित से जुड़े प्रशासनिक प्रश्नों को तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर सामने लाना है।

यदि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), संबंधित चिकित्सक, स्वास्थ्य विभाग अथवा कोई अन्य सक्षम अधिकारी इस विषय पर अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं, तो SMP24NEWS.COM उसे भी समान प्रमुखता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित करेगा।

📞 दस्तावेज, सूचना या अपना पक्ष साझा करने के लिए संपर्क करें:
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मो.: 7999236598

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