Home » मध्यप्रदेश » अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री रोकने की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, आखिर सरकार को क्यों जारी करना पड़ा यह आदेश?
अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री रोकने की व्यवस्था पर सवाल, आखिर सरकार को क्यों जारी करना पड़ा आदेश

अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री रोकने की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, आखिर सरकार को क्यों जारी करना पड़ा यह आदेश?

Facebook
X
WhatsApp

🚨 आखिर सरकार को क्यों जारी करना पड़ा यह आदेश? अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री रोकने की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

भोपाल। SMP24NEWS.COM

अवैध कॉलोनियों के नाम पर रजिस्ट्री रोकने के मामलों को लेकर मध्य प्रदेश शासन के हालिया आदेश के बाद अब एक नया सवाल चर्चा में है—आखिर सरकार को यह स्पष्ट आदेश जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?

दरअसल, प्रदेश के कई जिलों में वर्षों से ऐसे मामले सामने आ रहे थे जहां अवैध कॉलोनाइजेशन का हवाला देकर जमीनों की खरीदी-बिक्री और रजिस्ट्रियों पर रोक लगा दी जाती थी। कई जगह रजिस्ट्रियां महीनों तक अटकी रहीं, जबकि कुछ मामलों में लोगों से एनओसी (NOC) और अतिरिक्त अनुमतियां मांगी जा रही थीं।

📌 संबंधित खबरें

मध्य प्रदेश ब्रेकिंग: जमीन और प्लॉट खरीदने वालों के लिए ऐतिहासिक फैसला, अवैध कॉलोनी के नाम पर अब नहीं अटकेगी आपकी रजिस्ट्री

“>

क्या नियमों से बाहर जाकर लग रही थी रोक?

शासन को मिले दस्तावेजों और रिपोर्टों के परीक्षण में यह बात सामने आई कि कई आदेशों में रजिस्ट्री रोकने के लिए किसी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान का उल्लेख नहीं था। कुछ मामलों में ऐसे कानूनों का हवाला दिया गया जिनमें रजिस्ट्री रोकने का कोई अधिकार ही निर्धारित नहीं था।

यही वजह रही कि शासन को पूरे प्रदेश के लिए स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी और सभी संभागायुक्तों तथा कलेक्टरों को निर्देश जारी करने पड़े।

पंजीयन अधिकारियों पर डाली जा रही थी अतिरिक्त जिम्मेदारी

सरकार के संज्ञान में यह भी आया कि कुछ जिलों में पंजीयन अधिकारियों से यह अपेक्षा की जा रही थी कि वे रजिस्ट्री से पहले यह जांच करें कि संबंधित कॉलोनी वैध है या अवैध। शासन ने इसे नियमों के विपरीत माना है।

सरकार का स्पष्ट मत है कि पंजीयन अधिकारी का कार्य दस्तावेजों का पंजीयन करना है, न कि कॉलोनी की वैधता की जांच करना।

शासन ने क्या कहा?

निर्देशों में कहा गया है कि दस्तावेज का पंजीयन स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं होता, बल्कि वह दो पक्षों के बीच हुए लेन-देन का सार्वजनिक अभिलेख होता है। इसलिए केवल अवैध कॉलोनाइजेशन के आधार पर रजिस्ट्री रोकना उचित नहीं माना जा सकता।

📌 सबसे बड़ा सवाल

यदि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करनी है तो क्या उसका भार रजिस्ट्री कार्यालयों पर डाला जाना चाहिए, या फिर सीधे कॉलोनाइजरों और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए? शासन के नए निर्देश इसी दिशा में संकेत देते हैं।

अब आगे क्या होगा?

नए आदेश के बाद जिला प्रशासन अवैध कॉलोनियों और कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई तो कर सकेगा, लेकिन रजिस्ट्री रोकने के लिए उसे सक्षम न्यायिक या वैधानिक आदेश का आधार दिखाना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और आम नागरिकों की परेशानियां कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

🔴 यह भी पढ़ें

👉 90 दिन में करना होगा कार्रवाई! नरसिंहपुर भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने तय की समय-सीमा

👉 मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: भोपाल-इंदौर समेत कई जिलों में मौसम विभाग का नया अलर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

Weather Update

Cricket Score

advertisement box

News Portal Websites in India

Rashifal