भोपाल, 20 जून 2026 | SMP24NEWS.COM
मध्य प्रदेश सरकार ने लाखों शासकीय कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब विभागीय भविष्य निधि (GPF/DPF) से जुड़े भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। वित्त विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार 1 जुलाई 2026 से विभागीय भविष्य निधि के मामलों में मैन्युअल प्रक्रिया लगभग समाप्त हो जाएगी और सभी कार्यवाही डिजिटल माध्यम से की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को समय पर भुगतान उपलब्ध कराना, अनावश्यक कागजी प्रक्रिया को कम करना और पूरी प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है। नई व्यवस्था के तहत IFMIS (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) के माध्यम से आवेदन से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होगी।
क्या है GPF और क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव
सामान्य भविष्य निधि यानी GPF शासकीय कर्मचारियों की बचत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। कर्मचारी अपने वेतन से हर महीने एक निश्चित राशि GPF खाते में जमा करते हैं, जिस पर शासन की ओर से ब्याज भी दिया जाता है। सेवा निवृत्ति के समय या निर्धारित परिस्थितियों में यह राशि कर्मचारी को वापस मिलती है। अब तक कई मामलों में GPF भुगतान की प्रक्रिया कागजी दस्तावेजों पर आधारित थी, जिसके कारण कई बार कर्मचारियों को भुगतान प्राप्त करने में देरी का सामना करना पड़ता था। नई ऑनलाइन व्यवस्था से इस समस्या को काफी हद तक दूर करने की कोशिश की गई है।

कर्मचारियों को क्या करना होगा
नई व्यवस्था में कर्मचारियों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्रत्येक कर्मचारी को ESS पोर्टल पर अपने GPF खाते का नियमित अवलोकन करना होगा। यहां वे यह देख सकेंगे कि उनके वेतन से हर महीने कितनी राशि कट रही है और उस पर कितना ब्याज जोड़ा गया है। यदि किसी कर्मचारी को खाते में कोई त्रुटि या विसंगति दिखाई देती है तो उसे तुरंत अपने विभाग के DDO को सूचित करना होगा। सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति से चार माह पहले GPF अंशदान बंद कर ESS पोर्टल के माध्यम से अंतिम भुगतान के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
DDO की जिम्मेदारी भी बढ़ी
नई व्यवस्था में DDO को कर्मचारी द्वारा दिए गए विवरणों का मिलान सेवा पुस्तिका और GPF पासबुक से करना होगा। सत्यापन के बाद दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। यदि किसी खाते में मिसिंग क्रेडिट या अन्य त्रुटि पाई जाती है तो उसका सुधार कर समय पर प्रकरण आगे भेजना होगा। शासन ने निर्देश दिए हैं कि सेवानिवृत्ति की तिथि से कम से कम एक माह पहले प्रकरण ऑनलाइन अग्रेषित कर दिए जाएं।
सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी राशि
ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेजों की जांच के बाद संचालनालय पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित ई-प्राधिकार पत्र जारी किया जाएगा। इसके बाद GPF की राशि सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी। भुगतान उसी खाते में किया जाएगा जिसमें कर्मचारी का वेतन लगातार छह माह तक जमा हुआ हो।
मृत कर्मचारी के परिवार को भी मिलेगी सुविधा
यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है तो भुगतान उसके नामांकित व्यक्ति को किया जाएगा। नाबालिग नॉमिनी होने की स्थिति में राशि वैध संरक्षक के साथ संयुक्त बैंक खाते में जमा की जाएगी। यदि ई-प्राधिकार पत्र जारी होने के बाद लेकिन भुगतान से पहले कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो पुराने प्राधिकार पत्र को निरस्त कर नया प्राधिकार पत्र जारी किया जाएगा।
1 जुलाई से केवल ऑनलाइन प्रक्रिया मान्य
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई 2026 के बाद विभागीय भविष्य निधि भुगतान के लिए केवल ऑनलाइन जारी ई-प्राधिकार पत्र ही मान्य होंगे। मैन्युअल प्रक्रिया समाप्त कर दी जाएगी। ई-प्राधिकार पत्र जारी होने की तारीख से छह माह तक वैध रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर नया प्राधिकार पत्र जारी कराया जा सकेगा।
कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आवेदन से लेकर भुगतान तक अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन होने से समय की बचत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम भविष्य निधि भुगतान व्यवस्था को अधिक आधुनिक, सरल और कर्मचारी हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
Disclaimer: यह समाचार मध्य प्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
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