जॉइनिंग का दावा, लेकिन प्रभार नहीं; पदोन्नति आदेशों के पालन, कार्यमुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर उठे कई सवाल।
नरसिंहपुर। स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नति के बाद कर्मचारियों की पदस्थापना और कार्यभार ग्रहण को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। मामला सामान्य स्थानांतरण का नहीं, बल्कि पदोन्नति के बाद जारी किए गए पदस्थापना आदेशों के पालन से जुड़ा बताया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों ने पदोन्नति के बाद नए पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग तो दे दी है, लेकिन उन्हें अब तक विधिवत प्रभार नहीं सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि इसके बावजूद कुछ कर्मचारी अभी भी अपने पुराने कार्यालयों में कार्य कर रहे हैं।
हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी या लिखित आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरा मामला विभागीय रिकॉर्ड और अधिकारियों के पक्ष के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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CMHO और सिविल सर्जन कार्यालय के बीच हुई पदस्थापना
सूत्रों के अनुसार, पदोन्नति के बाद शरद रघुवंशी, दिनेश पटेल सहित दो महिला कर्मचारियों की पदस्थापना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय से सिविल सर्जन कार्यालय में की गई है।
वहीं मुकेश श्रीवास्तव को सिविल सर्जन कार्यालय से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में पदस्थ किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों का कहना है कि दो महिला कर्मचारियों में से एक को मलेरिया कार्यालय तथा दूसरी को सिविल सर्जन कार्यालय में कार्य करने के लिए पदस्थ किया गया है।
महिला कर्मचारियों की निजता और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके नाम प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं।
जॉइनिंग हुई, लेकिन प्रभार का इंतजार?
सूत्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों ने नई पदस्थापना वाली जगह पर अपनी जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी कर दी है, लेकिन नए पद का नियमित प्रभार अब तक नहीं सौंपा गया है।
विभागीय व्यवस्था में पदोन्नति के बाद कर्मचारी को नई जिम्मेदारी देने के लिए प्रभार ग्रहण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि जॉइनिंग हो चुकी है तो प्रभार देने में देरी क्यों हो रही है?
वहीं यह भी जानकारी सामने आई है कि कुछ कर्मचारियों को मौखिक रूप से दोनों कार्यालयों का काम देखने के लिए कहा गया है।
यदि ऐसा है तो सवाल यह है कि क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी किया गया है? यदि हां, तो वह आदेश किस सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया है?
पुराने कार्यालय में काम करने का आधार क्या?
पदोन्नति के बाद यदि किसी कर्मचारी की नई जगह पदस्थापना हो चुकी है और उसने वहां जॉइनिंग भी कर ली है, तो उसके पुराने कार्यालय में कार्य जारी रखने की प्रशासनिक स्थिति क्या है?
क्या संबंधित कर्मचारी को पुराने कार्यालय से कार्यमुक्त नहीं किया गया है?
यदि कार्यमुक्त नहीं किया गया, तो उसका कारण क्या है?
और यदि नए कार्यालय में प्रभार नहीं दिया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
ये सभी सवाल विभागीय रिकॉर्ड और आदेशों के माध्यम से ही स्पष्ट हो सकते हैं।
क्या मौखिक निर्देशों से चल रहा है काम?
प्रशासनिक व्यवस्था में पदस्थापना, कार्यमुक्ति, प्रभार ग्रहण और अतिरिक्त कार्यभार से जुड़े निर्णय सामान्यतः लिखित आदेशों के माध्यम से किए जाते हैं।
ऐसे में यदि कोई कर्मचारी दो कार्यालयों का कार्य देख रहा है, तो यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि इसके लिए विभागीय स्तर पर कोई आदेश जारी किया गया है या नहीं।
यदि कोई लिखित आदेश मौजूद है तो उससे स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि केवल मौखिक निर्देशों के आधार पर कार्य कराया जा रहा है तो प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पदोन्नति आदेशों के पालन पर सवाल
पदोन्नति कर्मचारियों के लिए नई जिम्मेदारी और नई प्रशासनिक भूमिका का अवसर होती है। ऐसे में पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद उसका समय पर पालन होना आवश्यक माना जाता है।
यदि आदेश जारी होने के बाद भी कर्मचारी लंबे समय तक पुराने स्थान पर कार्य करते हैं या उन्हें नई जिम्मेदारी नहीं मिलती, तो इससे विभागीय व्यवस्था और जवाबदेही पर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
SMP24NEWS ने व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से मांगा अधिकारियों का पक्ष
मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और विभाग का आधिकारिक पक्ष समाचार में शामिल करने के उद्देश्य से SMP24NEWS ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तथा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, नरसिंहपुर को व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से विस्तृत प्रश्न भेजकर उनका पक्ष मांगा है।
CMHO से शासन द्वारा जारी पदोन्नति/पदस्थापना आदेश के संबंध में पूछा गया है कि श्री मुकेश श्रीवास्तव की नई पदस्थापना के बाद क्या उन्होंने विधिवत प्रभार ग्रहण कर लिया है? यदि नहीं, तो इसका कारण क्या है? वहीं श्री शरद रघुवंशी, श्री दिनेश पटेल एवं अन्य कर्मचारियों को सिविल सर्जन कार्यालय में पदस्थ किए जाने के बाद उन्हें कार्यमुक्त (Relieve) किए जाने की स्थिति क्या है और आदेशों के पालन के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
वहीं सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक से पूछा गया है कि सिविल सर्जन कार्यालय में पदस्थ किए गए कर्मचारियों ने क्या विधिवत प्रभार ग्रहण कर लिया है? यदि नहीं, तो इसके पीछे क्या कारण है? साथ ही श्री मुकेश श्रीवास्तव को CMHO कार्यालय में पदस्थ किए जाने के बाद उन्हें कार्यमुक्त किए जाने की स्थिति और शासन के आदेशों के पालन के संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
दस्तावेजों के आधार पर होगी आगे की पड़ताल
स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नति के बाद पदस्थापना और प्रभार को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविक स्थिति संबंधित आदेशों, कार्यमुक्ति पत्र, प्रभार ग्रहण रिपोर्ट और विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
SMP24NEWS इस मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे भी तथ्यात्मक पड़ताल जारी रखेगा।
(संपादकीय टिप्पणी)
यह समाचार स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों से प्राप्त जानकारी और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े प्रश्नों के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में किसी व्यक्ति पर कोई अंतिम आरोप नहीं लगाया गया है। तथ्यों की पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष मांगा गया है। आधिकारिक जवाब प्राप्त होने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
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