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RTI दस्तावेज के अनुसार डॉ. संदीप पटेल को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी गई। सिविल सर्जन ने कहा कि करारवाई करना CMHO का कार्य है। SMP24NEWS.COM

RTI में बड़ा खुलासा: डॉ. संदीप पटेल को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं, सिविल सर्जन बोले– कार्रवाई करना मेरा काम नहीं

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नरसिंहपुर। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों ने जिले के स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला चिकित्सालय में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप पटेल के संबंध में सिविल सर्जन कार्यालय ने लिखित रूप से स्पष्ट किया है कि “इस कार्यालय द्वारा डॉ. संदीप पटेल को निजी अस्पताल/निजी क्लीनिक में चिकित्सा प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी गई है।” इसके बावजूद विभागीय स्तर पर किसी कार्रवाई के दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

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RTI में क्या मिला जवाब?

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत यह जानकारी मांगी गई थी कि क्या शासकीय सेवा में रहते हुए डॉ. संदीप पटेल को निजी अस्पताल अथवा निजी क्लीनिक में चिकित्सा प्रैक्टिस करने की अनुमति प्रदान की गई है।

इसके जवाब में सिविल सर्जन कार्यालय, जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर ने लिखित रूप से उत्तर दिया—

“इस कार्यालय द्वारा डॉ. संदीप पटेल को निजी अस्पताल/निजी क्लीनिक में चिकित्सा प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी गई है।”

यह उत्तर स्वयं विभाग द्वारा जारी किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सिविल सर्जन कार्यालय के अभिलेखों में ऐसी कोई अनुमति उपलब्ध नहीं है।


निजी अस्पताल में चिकित्सा सेवा को लेकर उठे सवाल

डॉ. संदीप पटेल से संबद्ध जगदीश हॉस्पिटल में चिकित्सा सेवाएं दिए जाने को लेकर पहले भी प्रश्न उठते रहे हैं। इसी संदर्भ में RTI के माध्यम से विभाग से यह स्पष्ट जानकारी मांगी गई थी कि क्या उन्हें शासकीय सेवा के दौरान निजी प्रैक्टिस की अनुमति प्रदान की गई है।

सिविल सर्जन कार्यालय के लिखित उत्तर के बाद यह मामला केवल एक चिकित्सक तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन गया है।


सिविल सर्जन बोले– कार्रवाई करना मेरा काम नहीं

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल के बाहर होने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई करना उनका कार्य नहीं है तथा यह अधिकार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) का है।

उन्होंने यह भी बताया कि उनके स्तर से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि उनके अनुसार यह विषय CMHO के अधिकार क्षेत्र में आता है।

सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सिविल सर्जन कार्यालय, नरसिंहपुर द्वारा जारी लिखित उत्तर, जिसमें डॉ. संदीप पटेल को निजी अस्पताल या निजी क्लीनिक में चिकित्सा प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दिए जाने का उल्लेख है।
RTI आवेदन के जवाब में सिविल सर्जन कार्यालय, नरसिंहपुर द्वारा जारी आधिकारिक पत्र, जिसमें बताया गया है कि डॉ. संदीप पटेल को इस कार्यालय द्वारा निजी अस्पताल/निजी क्लीनिक में चिकित्सा प्रैक्टिस करने की अनुमति प्रदान नहीं की गई है।

क्या संबंधित अधिकारी को सूचना भेजी गई?

मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रश्न यही है कि यदि सिविल सर्जन कार्यालय स्वयं लिखित रूप से स्वीकार कर रहा है कि संबंधित चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी गई थी, तो क्या इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी को कोई प्रतिवेदन, सूचना या विभागीय अनुशंसा भेजी गई?

यदि कार्रवाई करना वास्तव में CMHO के अधिकार क्षेत्र में था, तो क्या सिविल सर्जन कार्यालय ने अपने स्तर से CMHO को इस विषय से अवगत कराया? चर्चा के दौरान ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।


प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे प्रश्न

यह मामला अब केवल निजी प्रैक्टिस तक सीमित नहीं रह गया है। यह प्रशासनिक जवाबदेही और विभागीय समन्वय का भी विषय बन गया है।

यदि किसी सरकारी चिकित्सक को निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी गई थी और यह तथ्य विभागीय अभिलेखों में उपलब्ध था, तो क्या संबंधित अधिकारी का दायित्व केवल यह कहना भर था कि कार्रवाई किसी अन्य अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आती है? या फिर सक्षम अधिकारी को मामले की जानकारी देना और आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्राचार करना भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है?

इन प्रश्नों के उत्तर अभी सामने आना बाकी हैं।


अब CMHO कार्यालय से अपेक्षित है जवाब

सिविल सर्जन के कथन के बाद अब निगाहें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), नरसिंहपुर कार्यालय पर टिक गई हैं।

अब प्रमुख प्रश्न यह हैं—

  • क्या इस मामले में कोई विभागीय जांच प्रारंभ की गई?
  • क्या डॉ. संदीप पटेल के संबंध में कोई स्पष्टीकरण मांगा गया?
  • क्या किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई की गई?
  • यदि नहीं, तो इसके पीछे क्या कारण रहे?

इन सभी प्रश्नों के उत्तर आने के बाद ही पूरे मामले की प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


संपादकीय टिप्पणी

यह समाचार सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त लिखित अभिलेखों तथा सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी से हुई बातचीत पर आधारित है। समाचार में उल्लिखित तथ्य उपलब्ध दस्तावेजों एवं संबंधित अधिकारी के कथनों पर आधारित हैं।

यदि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), नरसिंहपुर, डॉ. संदीप पटेल अथवा संबंधित पक्ष अपना पक्ष या स्पष्टीकरण देना चाहते हैं, तो SMP24NEWS.COM उसे भी समान प्रमुखता एवं निष्पक्षता के साथ प्रकाशित करेगा।

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