RTI से सामने आया 15 अप्रैल 2026 का प्रमाणित आदेश; Exhumation पोस्टमार्टम के मेडिकल बोर्ड में तीन चिकित्सक, फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ का उल्लेख नहीं
नरसिंहपुर। डॉ. संदीप पटेल प्रकरण से जुड़े एक मामले में 15 अप्रैल 2026 को शव का Exhumation (शव उत्खनन) कर पोस्टमार्टम कराया गया था। इस पोस्टमार्टम के लिए गठित मेडिकल बोर्ड का आदेश अब RTI के माध्यम से सामने आया है।
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त प्रमाणित दस्तावेज के अनुसार, तीन चिकित्सकों को मेडिकल बोर्ड का सदस्य बनाया गया था। हालांकि, आदेश में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ का नाम या पदनाम दर्ज नहीं था।
इसी दस्तावेज के आधार पर अब यह सवाल उठ रहा है कि Exhumation पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड की संरचना किस नियम, शासनादेश, SOP या प्रचलित मेडिको-लीगल प्रक्रिया के तहत तय की गई थी।
यह रिपोर्ट किसी चिकित्सक को दोषी ठहराने का दावा नहीं करती। इसमें RTI से प्राप्त प्रमाणित सरकारी दस्तावेज में दर्ज तथ्यों और उनसे जुड़े सार्वजनिक महत्व के सवालों को सामने रखा गया है।
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पुलिस के अनुरोध पर गठित किया गया था मेडिकल बोर्ड
RTI से प्राप्त आदेश के अनुसार, संबंधित मामले में पुलिस के अनुरोध पर शव का उत्खनन कर उसे जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर लाया गया था। इसके बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था।
15 अप्रैल 2026 को जारी आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक कार्यालय से जारी किया गया था। आदेश में तीन चिकित्सकों को मेडिकल बोर्ड का सदस्य बनाया गया था तथा उन्हें नियमानुसार पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
इस प्रकार उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि संबंधित Exhumation पोस्टमार्टम के लिए विभागीय स्तर पर मेडिकल बोर्ड गठित किया गया था।
बोर्ड में शामिल किए गए थे तीन चिकित्सक
RTI से प्राप्त प्रमाणित आदेश के अनुसार मेडिकल बोर्ड में—
- डॉ. वीरेन्द्र पटेल — मेडिसिन विशेषज्ञ
- डॉ. श्रीमती मंजुलता सिसोदिया — शिशु रोग विशेषज्ञ
- डॉ. ओम बरोधिया — संविदा मेडिकल ऑफिसर
को सदस्य बनाया गया था।
आदेश में इन तीनों चिकित्सकों के नाम, विशेषज्ञता/पद और बोर्ड में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। वहीं, उपलब्ध आदेश में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ का उल्लेख नहीं है।
यहीं से इस मामले में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और मेडिको-लीगल सवाल सामने आता है कि मेडिकल बोर्ड की संरचना निर्धारित करते समय संबंधित विभाग ने किस नियम अथवा प्रक्रिया को आधार बनाया था।

सवाल बोर्ड की वैधता का नहीं, गठन के आधार का
RTI से प्राप्त आदेश में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ का उल्लेख नहीं होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मेडिकल बोर्ड अवैध था अथवा पोस्टमार्टम रिपोर्ट गलत थी।
मुख्य प्रश्न यह है कि 15 अप्रैल 2026 को बोर्ड की संरचना तय करने के लिए कौन-सा नियम, शासनादेश, SOP या विभागीय निर्देश लागू था।
क्या Exhumation पोस्टमार्टम के लिए कोई विशेष प्रक्रिया निर्धारित थी?
क्या उस प्रक्रिया में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ की भूमिका निर्धारित थी?
क्या उस समय जिले या आसपास के किसी शासकीय चिकित्सा संस्थान में ऐसा विशेषज्ञ उपलब्ध था?
यदि उपलब्ध था, तो क्या उसे बोर्ड में शामिल करने पर विचार किया गया था?
यदि उपलब्ध नहीं था, तो क्या किसी मेडिकल कॉलेज या अन्य शासकीय संस्थान से विशेषज्ञ की सेवाएं लेने का प्रयास किया गया था?
इन सवालों का स्पष्ट उत्तर संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और अधिकारियों के पक्ष से ही सामने आ सकता है।
Exhumation सामान्य पोस्टमार्टम से अलग प्रक्रिया थी
Exhumation यानी शव उत्खनन में पहले से दफन शव को बाहर निकालकर चिकित्सकीय परीक्षण और पोस्टमार्टम कराया जाता है। ऐसी प्रक्रिया में शव की स्थिति, चिकित्सकीय निष्कर्ष और उपलब्ध मेडिको-लीगल साक्ष्यों का महत्व रहता है।
सुप्रीम कोर्ट ने Mohammad Latief Magrey बनाम Union Territory of Jammu & Kashmir मामले में Exhumation से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया था। 12 सितंबर 2022 के फैसले में न्यायालय ने उस समय लागू दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176(3) के संदर्भ में Exhumation की प्रक्रिया पर विचार किया था।
इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने Exhumation से संबंधित एक व्यापक कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता के पहलू पर भी विचार किया था। हालांकि इस निर्णय से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि हर Exhumation पोस्टमार्टम के मेडिकल बोर्ड में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ का होना अनिवार्य है।
इसलिए नरसिंहपुर के मामले में उस समय लागू मध्य प्रदेश शासन और स्वास्थ्य विभाग के नियम/SOP महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
क्या उस समय फॉरेंसिक विशेषज्ञ उपलब्ध था?
अब इस मामले में यह तथ्य सामने आना बाकी है कि 15 अप्रैल 2026 को मेडिकल बोर्ड गठित किए जाने के समय फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ उपलब्ध था या नहीं।
यदि विशेषज्ञ उपलब्ध था, तो क्या उसे मेडिकल बोर्ड में शामिल करने पर विचार किया गया था?
यदि उपलब्ध नहीं था, तो क्या किसी मेडिकल कॉलेज अथवा अन्य शासकीय चिकित्सा संस्थान से फॉरेंसिक विशेषज्ञ की सेवाएं लेने का प्रयास किया गया था?
और यदि ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया था, तो तीन सदस्यीय बोर्ड की मौजूदा संरचना तय करने का आधार क्या था?
इन प्रश्नों का उत्तर विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट हो सकेगा।
4 अगस्त को WhatsApp पर सिविल सर्जन से मांगा गया पक्ष
मेडिकल बोर्ड की संरचना से जुड़े सवालों पर SMP24NEWS द्वारा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजकुमार चौधरी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया।
इसके लिए 4 अगस्त 2026 को उनके व्यक्तिगत WhatsApp नंबर पर संदेश भेजा गया था।
संदेश में उनसे पूछा गया था कि मेडिकल बोर्ड का गठन किस नियम/SOP के तहत किया गया था, Exhumation पोस्टमार्टम में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ को शामिल क्यों नहीं किया गया तथा क्या उस समय फॉरेंसिक विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं था अथवा किसी अन्य कारण से उसे बोर्ड में शामिल नहीं किया गया था।
समाचार तैयार किए जाने तक सिविल सर्जन का पक्ष प्राप्त नहीं हुआ है। उनका जवाब प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

प्रकरण की जांच अभी जारी
इस मामले से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार प्रकरण की जांच अभी जारी है। ऐसे में मेडिकल बोर्ड की संरचना को लेकर सामने आए सवालों का अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित सरकारी अभिलेखों के आधार पर ही सामने आएगा।
इस रिपोर्ट में भी किसी चिकित्सक के विरुद्ध दोष सिद्ध होने अथवा किसी प्रक्रिया को अवैध घोषित किए जाने का दावा नहीं किया जा रहा है।
वर्तमान में उपलब्ध तथ्य केवल इतना बताते हैं कि 15 अप्रैल 2026 के मेडिकल बोर्ड गठन आदेश में तीन चिकित्सकों को सदस्य बनाया गया था और उस आदेश में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ का उल्लेख नहीं था।
RTI दस्तावेज बना पड़ताल का आधार
इस रिपोर्ट का आधार किसी अनौपचारिक सूचना के बजाय RTI के माध्यम से प्राप्त प्रमाणित सरकारी दस्तावेज है।
आदेश में मेडिकल बोर्ड के तीन सदस्यों के नाम तथा उनकी विशेषज्ञता/पद का उल्लेख किया गया है। इसी दस्तावेज में फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ का नाम या पदनाम दिखाई नहीं देता।
अब महत्वपूर्ण यह है कि उस समय लागू विभागीय नियम इस प्रकार के Exhumation पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड की संरचना के संबंध में क्या कहते थे।
आगे भी जारी रहेगी दस्तावेज आधारित पड़ताल
SMP24NEWS इस मामले में उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड, RTI दस्तावेज और अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष के आधार पर पड़ताल जारी रखेगा।
आगे की पड़ताल में मेडिकल बोर्ड गठन से संबंधित शासनादेश/SOP, मेडिको-लीगल प्रक्रिया और जांच से जुड़े अन्य सरकारी दस्तावेजों की जानकारी सामने आने पर मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
सिविल सर्जन का पक्ष प्राप्त होने के बाद उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा। प्रकरण की जांच जारी होने के कारण अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही सामने आएगा।
🔹 RTI Exclusive: डॉ. संदीप पटेल प्रकरण में मेडिकल बोर्ड गठन का दस्तावेज सामने आया
15 अप्रैल 2026 को पुलिस के अनुरोध पर तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड गठन के आदेश से जुड़ी दस्तावेज आधारित रिपोर्ट पढ़ें।
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