नरसिंहपुर। वर्ष 2021-22 की ICTC भर्ती प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब एक नया सवाल सामने आया है। Counsellor पद की चयन प्रक्रिया को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने WP No.11877/2024 में 9 अप्रैल 2026 को आदेश पारित किया था। आदेश के अनुपालन में Counsellor पद के लिए पुनः इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं इसी भर्ती प्रक्रिया में शामिल रहे Lab Technician पद को लेकर अलग कार्रवाई किए जाने का आधार अब सवालों के घेरे में है।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार Counsellor पद की चयन प्रक्रिया में इंटरव्यू पैनल से संबंधित गंभीर कमी पाई गई थी। कोर्ट ने संबंधित चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण मानते हुए पूर्व नियुक्तियों से संबंधित आदेश निरस्त किए और नए पैनल के माध्यम से अभ्यर्थियों का पुनः इंटरव्यू कर नई अंतिम सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
इसके बाद CMHO कार्यालय द्वारा 3 अगस्त 2026 को Counsellor पद के अभ्यर्थियों के पुनः इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू की गई। पूर्व में नियुक्त Counsellors की सेवाओं को समाप्त किए जाने की कार्रवाई भी सामने आई।
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Lab Technician को लेकर क्यों उठा सवाल?
उपलब्ध भर्ती अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2021-22 में ICTC Counsellor और Lab Technician दोनों पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आयोजित हुई थी। दोनों पदों के लिए 24 फरवरी 2022 को साक्षात्कार आयोजित किए गए थे।
ऐसे में अब सवाल यह है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद Counsellor पद की चयन प्रक्रिया को दोबारा कराया जा रहा है, लेकिन Lab Technician पद के चयन को लेकर इसी तरह की समीक्षा क्यों दिखाई नहीं देती?
हालांकि, उपलब्ध हाईकोर्ट आदेश के आधार पर Lab Technician की नियुक्ति को अवैध कहना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट के आदेश में Lab Technician की नियुक्ति निरस्त करने का कोई निर्देश सामने नहीं है। इसलिए इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि Lab Technician को पुनः चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं करने का प्रशासनिक अथवा कानूनी आधार क्या है।
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CMHO मनीष मिश्रा ने क्या कहा?
इस संबंध में SMP24NEWS ने CMHO डॉ. मनीष कुमार मिश्रा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया। उनसे पूछा गया कि जब Counsellor पद की चयन प्रक्रिया को हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में दोबारा कराया जा रहा है, तो Lab Technician पद के संबंध में अलग रुख का आधार क्या है।
CMHO डॉ. मनीष कुमार मिश्रा ने जवाब दिया:
“आप माननीय उच्च न्यायालय के आदेश को ध्यान से पढ़ें, फिर बात कीजिए।”
CMHO के इस जवाब के बाद अब हाईकोर्ट के आदेश और भर्ती रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट करना जरूरी हो गया है कि Lab Technician पद पर अलग कार्रवाई का आधार क्या है।
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RTI के जरिए मांगी गई जानकारी
SMP24NEWS द्वारा इस मामले में RTI के माध्यम से जानकारी मांगी गई है। इसमें यह जानने का प्रयास किया गया है कि Lab Technician चयन को पुनः प्रक्रिया में शामिल नहीं करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, उसका आधार क्या है और क्या इस संबंध में मध्यप्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति, भोपाल से कोई लिखित निर्देश, अनुमोदन या अन्य अभिलेख उपलब्ध है।
यदि संबंधित रिकॉर्ड में Lab Technician चयन को अलग रखने का स्पष्ट कारण मौजूद है, तो उससे स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि ऐसा कोई लिखित आधार नहीं है, तो यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाएगा कि दोनों पदों के संबंध में अलग-अलग कार्रवाई क्यों की गई।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर Lab Technician की नियुक्ति को अवैध कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन Counsellor चयन पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसी भर्ती प्रक्रिया के दूसरे पद को लेकर उठे सवाल का जवाब संबंधित रिकॉर्ड से मिलना जरूरी है।
RTI से प्राप्त जानकारी और विभागीय रिकॉर्ड सामने आने के बाद इस मामले में आगे की रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी।
अस्वीकरण
अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों, न्यायालयीन आदेशों एवं संबंधित अधिकारियों से प्राप्त जानकारी/पक्ष के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में उठाए गए सवाल उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर हैं। Lab Technician की नियुक्ति को अवैध नहीं बताया गया है, बल्कि उसकी चयन प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण की आवश्यकता संबंधी प्रश्न उठाया गया है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अंतिम अर्थ और उसका प्रशासनिक अनुपालन संबंधित सक्षम प्राधिकारी के अधीन है। CMHO डॉ. मनीष कुमार मिश्रा का पक्ष भी समाचार में उनके द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार शामिल किया गया है। किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं है। यदि संबंधित पक्ष कोई अतिरिक्त दस्तावेज या स्पष्टीकरण उपलब्ध कराता है, तो उसे भी समाचार में उचित स्थान दिया जाएगा।
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