EXCLUSIVE | पदोन्नति के बाद भी पुरानी ‘मलाईदार कुर्सियों’ पर जमे कर्मचारी? CMHO–सिविल सर्जन की भूमिका पर सवाल
नई पदस्थापना के बावजूद प्रभार और कार्यमुक्ति को लेकर सवाल; दो महिला कर्मचारियों की पदस्थापना भी बदली, फिर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
नरसिंहपुर। स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नति के बाद कर्मचारियों की नई पदस्थापना, कार्यमुक्ति और प्रभार को लेकर उठे सवाल अब और गंभीर हो गए हैं। SMP24NEWS की पिछली रिपोर्ट में पदोन्नति के बाद नई पदस्थापना पर जॉइनिंग और प्रभार की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए थे। अब उपलब्ध दस्तावेजों और सामने आई जानकारी के आधार पर यह सवाल भी सामने आया है कि नई पदस्थापना के बाद भी कुछ कर्मचारी अपनी पुरानी महत्वपूर्ण सीटों पर क्यों बने हुए हैं?
मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार शरद रघुवंशी, दिनेश पटेल तथा दो महिला कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद पदस्थापना CMHO कार्यालय से सिविल सर्जन कार्यालय की ओर की गई है। वहीं मुकेश श्रीवास्तव को सिविल सर्जन कार्यालय से CMHO कार्यालय में पदस्थ किए जाने की जानकारी है।
दो महिला कर्मचारियों में से एक की पदस्थापना मलेरिया कार्यालय तथा दूसरी की सिविल सर्जन कार्यालय में किए जाने की जानकारी सामने आई है। दोनों महिला कर्मचारियों के नाम SMP24NEWS द्वारा प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं।
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पिछली खबर में उठाया गया था प्रभार और कार्यमुक्ति का सवाल
SMP24NEWS ने अपनी पिछली रिपोर्ट में पदोन्नत कर्मचारियों की नई पदस्थापना और प्रभार को लेकर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में यह सामने आया था कि कुछ कर्मचारियों ने नई पदस्थापना पर जॉइनिंग तो दी, लेकिन उन्हें विधिवत प्रभार नहीं मिलने की बात सामने आई थी। साथ ही कुछ कर्मचारियों के पुराने कार्यालयों में ही कार्य करने के दावे भी सामने आए थे।
उस समय सबसे बड़ा सवाल यह था कि यदि शासन के आदेश के अनुसार पदस्थापना बदल चुकी है, तो संबंधित कर्मचारियों को पुरानी जगह से कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया और नई जगह प्रभार क्यों नहीं दिया गया?
अब Follow-up में इसी सवाल का अगला पहलू सामने आया है।
नई पदस्थापना के बाद भी पुरानी सीट क्यों?
यदि किसी कर्मचारी की पदोन्नति के बाद नई पदस्थापना हो चुकी है और उसने वहां जॉइनिंग भी दे दी है, तो उसके पुराने कार्यालय अथवा पुरानी सीट पर कार्य करने का प्रशासनिक आधार क्या है?
क्या संबंधित कर्मचारी को पुरानी जगह से कार्यमुक्त नहीं किया गया? यदि नहीं किया गया, तो इसका कारण क्या है?
और यदि उसे पुरानी सीट पर काम करने की अनुमति दी गई है, तो क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश, सक्षम अधिकारी की अनुमति अथवा प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है?
यही सवाल अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं।
‘मलाईदार कुर्सी’ छोड़ने को तैयार नहीं होने की चर्चा
स्वास्थ्य विभाग के भीतर यह चर्चा भी सामने आ रही है कि कुछ महत्वपूर्ण और लंबे समय से प्रभावशाली मानी जाने वाली सीटों को छोड़ने में कर्मचारी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसी कारण पदोन्नति और नई पदस्थापना के बाद भी पुरानी सीटों पर बने रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इसी स्थिति को लेकर सवाल है कि क्या पदोन्नति के बाद भी कुछ कर्मचारी अपनी पुरानी ‘मलाईदार कुर्सी’ छोड़ना नहीं चाहते?
हालांकि किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत मंशा के संबंध में अंतिम निष्कर्ष विभागीय रिकॉर्ड और संबंधित पक्ष के जवाब के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
CMHO डॉ. मनीष मिश्रा और सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी की भूमिका पर सवाल
मामले में अब कर्मचारियों के साथ-साथ CMHO डॉ. मनीष मिश्रा और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजकुमार चौधरी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
यदि दोनों कार्यालयों के अधिकारियों के संज्ञान में पदोन्नत कर्मचारियों की नई पदस्थापना और प्रभार की स्थिति है, तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि शासन के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए क्या कदम उठाए गए।
क्या संबंधित कर्मचारियों को नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए?
क्या पुराने कार्यालय से कार्यमुक्त करने की कार्रवाई की गई?
यदि कर्मचारी पुरानी सीट पर ही कार्य कर रहे हैं, तो क्या इसकी कोई लिखित अनुमति जारी की गई है?
इन सवालों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकता है।
संरक्षण के आरोप, अधिकारियों से मांगा जवाब
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि कुछ पदोन्नत कर्मचारियों को अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण वे नई पदस्थापना के बावजूद पुरानी महत्वपूर्ण सीटों पर बने हुए हैं।
SMP24NEWS इस आरोप को अंतिम निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहा है। इसी कारण दोनों अधिकारियों से सीधे उनका पक्ष मांगा गया है कि क्या ऐसी कोई प्रशासनिक अनुमति या व्यवस्था उनके स्तर से की गई है।
CMHO डॉ. मनीष मिश्रा से पूछा गया है कि पदोन्नत कर्मचारियों को नई पदस्थापना पर प्रभार क्यों नहीं दिया गया, क्या पुरानी सीट पर कार्य करने की कोई लिखित अनुमति है और शासन के आदेशों का पालन कराने के लिए उनके स्तर से क्या कार्रवाई की गई है।
वहीं सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी से पूछा गया है कि सिविल सर्जन कार्यालय में पदस्थ किए गए कर्मचारियों को प्रभार क्यों नहीं दिया गया, संबंधित कर्मचारियों को पुराने कार्यालय से कार्यमुक्त किए जाने की स्थिति क्या है और क्या पुरानी सीट पर काम करने के लिए कोई लिखित आदेश जारी किया गया है।
WhatsApp पर भेजे गए सवाल
SMP24NEWS ने दोनों अधिकारियों को WhatsApp के माध्यम से लिखित रूप से सवाल भेजकर उनका आधिकारिक पक्ष मांगा है।
अधिकारियों से विशेष रूप से पूछा गया है कि—
1. क्या आपको इस स्थिति की जानकारी है?
2. पदोन्नत कर्मचारियों को सिविल सर्जन कार्यालय में प्रभार क्यों नहीं दिया गया?
3. क्या उन्हें पुरानी सीट पर कार्य करने की कोई लिखित अनुमति/आदेश दिया गया है?
4. क्या संबंधित कर्मचारियों को पुरानी जगह से कार्यमुक्त नहीं किए जाने का कोई प्रशासनिक कारण है?
5. यह आरोप भी सामने आया है कि अधिकारियों के संरक्षण के कारण कुछ कर्मचारी पुरानी सीटों पर बने हुए हैं। इस पर आपका क्या पक्ष है?
6. शासन के पदोन्नति एवं पदस्थापना आदेशों का पालन कराने के लिए आपके स्तर से क्या कार्रवाई की गई है?
समाचार तैयार किए जाने तक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ था।
क्या शासन का आदेश लागू होगा या पुरानी कुर्सी ही रहेगी?
पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जब पदोन्नति के बाद नई पदस्थापना का आदेश जारी हो चुका है, तो उसका वास्तविक पालन कब होगा?
यदि किसी कर्मचारी को प्रशासनिक आवश्यकता के कारण पुरानी सीट पर ही कार्य करना है, तो उसके लिए सक्षम अधिकारी का स्पष्ट लिखित आदेश होना चाहिए। यदि ऐसा कोई आदेश नहीं है, तो पदोन्नति और नई पदस्थापना के बावजूद पुरानी सीट पर काम करने की स्थिति प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।
दस्तावेजों के आधार पर आगे भी जारी रहेगी पड़ताल
SMP24NEWS इस पूरे मामले में पदोन्नति आदेश, नई पदस्थापना, जॉइनिंग, कार्यमुक्ति और प्रभार से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पड़ताल जारी रखेगा।
शरद रघुवंशी, दिनेश पटेल, मुकेश श्रीवास्तव तथा दो महिला कर्मचारियों की पदस्थापना से जुड़े तथ्यों की भी दस्तावेजों के आधार पर जांच की जा रही है। महिला कर्मचारियों की निजता को ध्यान में रखते हुए उनके नाम प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं।
यदि CMHO डॉ. मनीष मिश्रा, सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी अथवा संबंधित कर्मचारियों की ओर से कोई आधिकारिक जवाब, आदेश या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है, तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
संपादकीय टिप्पणी
यह Follow-up रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों, प्राप्त जानकारी और संबंधित अधिकारियों से मांगे गए पक्ष पर आधारित है। ‘संरक्षण’ से संबंधित आरोपों को संबंधित अधिकारियों के जवाब के साथ ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए। SMP24NEWS का उद्देश्य पदोन्नति एवं पदस्थापना आदेशों के पालन, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवालों को सामने रखना है।
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