अपर कलेक्टर के आदेश के 20 दिन से अधिक समय बाद भी कार्रवाई पर सवाल; शिकायतकर्ता का आरोप—राजनीतिक रसूख के चलते खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं कर पा रहीं कार्रवाई; सोमवार को कार्यालय खुलने पर क्या एक लाख रुपये का अर्थदंड जमा कराया जाएगा या निलंबित पंजीयन के बावजूद कारोबार करने वाले प्रतिष्ठान पर होगी कार्रवाई?
नरसिंहपुर। जिले में खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन और आम नागरिकों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है, लेकिन जब विभाग की अपनी कार्रवाई के बाद जारी आदेश के पालन को लेकर ही सवाल खड़े होने लगें तो विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शहर के बाहरी रोड स्थित ‘कामधेनु डेयरी एंड स्वीट्स’ का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। अपर कलेक्टर एवं न्याय निर्णयन अधिकारी ने 13 अक्टूबर 2026 को प्रतिष्ठान के संचालक पर एक लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया था। आदेश में अर्थदंड जमा होने तक कारोबार की अनुज्ञप्ति निलंबित रखने का स्पष्ट निर्देश है। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रतिष्ठान का कारोबार जारी है और आदेश के पालन को लेकर विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक रसूख और संरक्षण के चलते खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्रवाई करने से बच रही हैं। उनका कहना है कि आदेश जारी हुए 20 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो अर्थदंड जमा कराने की स्थिति स्पष्ट हुई है और न ही प्रतिष्ठान के संचालन को लेकर किसी प्रभावी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
निरीक्षण में नहीं दिखा पाए खाद्य पंजीयन, कई खाद्य पदार्थ बिक्री के लिए मिले
न्यायालय अपर कलेक्टर एवं न्याय निर्णयन अधिकारी, नरसिंहपुर के प्रकरण क्रमांक 0005 स-147 वर्ष 2026-27 में दर्ज तथ्यों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुश्री सारिका दुबे ने 19 जून 2026 को कामधेनु डेयरी एंड स्वीट्स का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में दूध, मगज के लड्डू, मिल्क केक, लस्सी, पनीर, मक्खन सहित अन्य खाद्य पदार्थ मानव उपभोग और बिक्री के लिए रखे पाए गए थे।
आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार, मौके पर मौजूद व्यक्ति ने अपना नाम प्रभात कुर्मी बताते हुए स्वयं को दुकान का संचालक बताया था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा निर्धारित खाद्य पंजीयन प्रस्तुत करने को कहने पर वह मौके पर पंजीयन प्रस्तुत नहीं कर सका। निरीक्षण के दौरान पंचनामा तैयार किया गया और संबंधित व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी कराए गए।
इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26(2)(v), धारा 31(2) तथा धारा 58 के तहत प्रकरण न्याय निर्णयन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया।

सुनवाई में अनुपस्थित रहे संचालक, एक लाख रुपये का अर्थदंड
प्रकरण में 21 सितंबर 2026 को नोटिस जारी किया गया था। आदेश के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 को निर्धारित सुनवाई के दौरान अनावेदक उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद उपलब्ध अभिलेखों और दस्तावेजों के आधार पर एकपक्षीय कार्यवाही की गई।
न्याय निर्णयन अधिकारी ने निर्धारित पंजीयन के बिना खाद्य कारोबार किए जाने को अधिनियम की संबंधित धाराओं का उल्लंघन माना और धारा 49 के प्रावधानों पर विचार करते हुए धारा 58 के अंतर्गत एक लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया। यह आदेश 13 अक्टूबर 2026 को पारित किया गया।
आदेश में स्पष्ट निर्देश, अर्थदंड जमा होने तक अनुज्ञप्ति निलंबित
आदेश के पैरा 07 में अर्थदंड की राशि निर्धारित शासकीय मद में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अर्थदंड जमा नहीं होने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 96 के तहत भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूली किए जाने का प्रावधान बताया गया है।
आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि शास्ति के संदत्त होने तक अनावेदक के कारोबार की अनुज्ञप्ति निलंबित रहेगी। यानी आदेश के अनुसार अर्थदंड जमा होने तक संबंधित कारोबार की अनुज्ञप्ति अस्थायी रूप से निलंबित रखी जानी है। आदेश की प्रतिलिपि तहसीलदार नरसिंहपुर को राजस्व वसूली के लिए तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारी को जानकारी एवं पालन के लिए भेजी गई थी।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी से पूछा—कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आदेश के पालन की स्थिति जानने के लिए शिकायतकर्ता ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुश्री सारिका दुबे को फोन किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने अधिकारी से पूछा कि जब तक एक लाख रुपये का अर्थदंड जमा नहीं होता, तब तक अनुज्ञप्ति निलंबित रखने का आदेश है, तो विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पर अधिकारी ने जवाब दिया कि दुकान संचालक को अपील करने के लिए 30 दिन का समय मिलता है और इस अवधि में वह कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं। अधिकारी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि यदि वह कार्रवाई करेंगी तो उनके विरुद्ध ही कार्रवाई हो सकती है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस जवाब के बाद उन्होंने कानूनी सलाह लेकर दोबारा अधिकारी से संपर्क किया और आदेश के पालन को लेकर सवाल किया। इस दौरान अधिकारी कथित तौर पर नाराजगी जताते हुए बोलीं, “भैया, मुझे एक-दो दिन की छुट्टी मिलती है, मैं काम कर लूं।”
शिकायतकर्ता का कहना है कि अधिकारी के इस जवाब से मूल सवाल का समाधान नहीं हुआ कि क्या संचालक ने अपील की है और क्या किसी सक्षम प्राधिकारी ने आदेश पर स्थगन दिया है।
20 दिन से अधिक समय बीता, राजनीतिक संरक्षण का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई में राजनीतिक रसूख और संरक्षण बाधा बन रहे हैं। उनका कहना है कि एक लाख रुपये का अर्थदंड और अनुज्ञप्ति निलंबित रखने का आदेश होने के बावजूद 20 दिन से अधिक समय बीत जाने पर भी विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि किसी सामान्य दुकानदार के मामले में ऐसा आदेश होता तो क्या विभाग इसी तरह इंतजार करता रहता?
हालांकि, राजनीतिक संरक्षण या किसी व्यक्ति के हस्तक्षेप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में संबंधित प्रतिष्ठान संचालक और विभाग का पक्ष सामने आना आवश्यक है। विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अर्थदंड जमा हुआ है या नहीं, अपील प्रस्तुत हुई है या नहीं तथा कोई स्थगन आदेश जारी किया गया है या नहीं।
सोमवार 2 नवंबर को विभाग के सामने तीन बड़े सवाल
अब सोमवार, 2 नवंबर 2026 को खाद्य सुरक्षा विभाग का कार्यालय खुलने पर विभाग की कार्रवाई पर नजर रहेगी। क्या विभाग प्रतिष्ठान के संचालक से एक लाख रुपये का अर्थदंड जमा कराएगा? क्या निलंबित अनुज्ञप्ति के बावजूद कारोबार जारी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी? और क्या खाद्य सुरक्षा अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी देकर आदेश का पालन सुनिश्चित कराएंगी?
खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुश्री सारिका दुबे का शिकायतकर्ता द्वारा बताई गई फोन बातचीत के अतिरिक्त कोई लिखित पक्ष इस समाचार के लिए उपलब्ध नहीं है। उनका आधिकारिक पक्ष और प्रतिष्ठान संचालक का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
अब देखना यह है कि सोमवार को खाद्य सुरक्षा विभाग न्याय निर्णयन अधिकारी के आदेश के पालन के लिए ठोस कदम उठाता है या मामला इसी तरह सवालों के बीच बना रहता है। आखिर एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाने और अनुज्ञप्ति निलंबित करने का आदेश जारी होने के बाद उसका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
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शिकायत के आधार पर खाद्य विभाग की कार्रवाई, निरीक्षण में नहीं प्रस्तुत कर सके खाद्य पंजीयन।





