राकेश बोरला ने उठाया बड़ा मुद्दा: DDO का प्रभार न मिलने से नरसिंहपुर आयुष विभाग के कर्मचारियों का वेतन अटका
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नरसिंहपुर जिले के आयुष विभाग में इन दिनों प्रशासनिक अव्यवस्था का असर सीधे अधिकारियों और कर्मचारियों पर दिखाई दे रहा है। जिले में आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) का प्रभार निर्धारित नहीं होने के कारण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का मई 2026 का वेतन अब तक जारी नहीं हो पाया है। वेतन भुगतान में हुई इस देरी को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और अब कर्मचारी संगठन ने भी इस मुद्दे को शासन स्तर तक पहुंचा दिया है।
मध्य प्रदेश आयुर्वेदिक होम्योपैथी कर्मचारी संघ के राकेश कुमार बोरिया प्रदेश अध्यक्ष ने इस मामले को गंभीर बताते हुए आयुक्त संचालनालय आयुष, मध्यप्रदेश शासन भोपाल, प्रमुख सचिव तथा कलेक्टर नरसिंहपुर को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि जिला स्तर पर प्रशासनिक बदलाव होने के बाद भी अभी तक प्रभारी अधिकारी को आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) का प्रभार नहीं दिया गया है। इसके कारण वेतन आहरण और भुगतान की संपूर्ण प्रक्रिया प्रभावित हो गई है।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक माह की पहली तारीख तक कर्मचारियों के खातों में वेतन पहुंच जाना चाहिए। इसके बावजूद जून माह के पहले सप्ताह तक भी मई माह का वेतन जारी नहीं हो सका है। कर्मचारियों का आरोप है कि यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर दी जाती और किसी सक्षम अधिकारी को DDO का प्रभार सौंप दिया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
वेतन नहीं मिलने से सबसे अधिक परेशानी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को हो रही है, जो अपने मासिक वेतन पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं। कई कर्मचारियों ने बैंक और वित्तीय संस्थाओं से ऋण ले रखे हैं, जिनकी मासिक किश्तें समय पर जमा नहीं हो पा रही हैं। इसके कारण ईएमआई बाउंस होने और अतिरिक्त पेनाल्टी लगने का खतरा बढ़ गया है। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि वेतन में देरी के कारण घर का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना भी कठिन हो रहा है।
वेतन भुगतान नहीं होने का असर कर्मचारियों के परिवारों पर भी पड़ रहा है। बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में दिक्कतें आ रही हैं, किराया और अन्य आवश्यक भुगतान प्रभावित हो रहे हैं तथा घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में परेशानी हो रही है। कर्मचारियों का कहना है कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।
कर्मचारी संगठन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि विभागीय स्तर पर DDO का प्रभार लंबित रहने के कारण न केवल वेतन भुगतान प्रभावित हुआ है बल्कि विभागीय वित्तीय कार्यों पर भी असर पड़ सकता है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो अन्य प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों में भी बाधा उत्पन्न होने की आशंका है।
राकेश कुमार बोरिया ने मांग की है कि नरसिंहपुर जिले में तत्काल किसी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी अथवा प्रभारी अधिकारी को DDO का प्रभार सौंपा जाए, ताकि लंबित वेतन का भुगतान शीघ्र हो सके। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक संकट से बचाने के लिए शासन को तत्काल निर्णय लेना चाहिए। कर्मचारी संगठन ने उम्मीद जताई है कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालेगा।
वहीं कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि जब शासन की ओर से वेतन भुगतान के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है, तब इस प्रकार की प्रशासनिक देरी क्यों हो रही है। कर्मचारियों का मानना है कि यदि समय पर आवश्यक आदेश जारी किए जाते तो आज उन्हें अपने वेतन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता।
फिलहाल सभी की निगाहें आयुक्त संचालनालय आयुष और शासन के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द ही DDO का प्रभार किसी अधिकारी को सौंपा जाता है तो कर्मचारियों के लंबित वेतन का भुगतान संभव हो सकेगा। लेकिन यदि यह स्थिति और लंबी खिंचती है तो कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ सकता है तथा मामला व्यापक स्तर पर उठ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नरसिंहपुर आयुष विभाग के कर्मचारियों को उनके मेहनताने के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा और प्रशासनिक देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
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