नरसिंहपुर, 27 जून 2026 | SMP24NEWS.COM
सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) क्या सिर्फ औपचारिक जवाब देने का माध्यम बनकर रह गया है? यह सवाल जिला आयुष कार्यालय, नरसिंहपुर द्वारा दिए गए एक आरटीआई जवाब के बाद खड़ा हो गया है। विभाग ने तीन आयुर्वेद कंपाउंडरों के अटैचमेंट को “माननीय कलेक्टर के अनुमोदन से” बताया, लेकिन जिस आदेश और नोटशीट के आधार पर यह दावा किया गया, उसकी एक भी प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई।
तीन कर्मचारियों के अटैचमेंट पर मांगे गए थे दस्तावेज
आरटीआई में लोकमन धुर्वे (उसरी), संजीव सोनी (खैरी) और दीपक कतिया (मुर्गाखेड़ा) की मूल पदस्थापना, अटैचमेंट आदेशों की प्रमाणित प्रतियां, संबंधित नोटशीट, प्रशासनिक आधार, वर्तमान व्यवस्था और वर्ष 2025-26 की ओपीडी संबंधी जानकारी मांगी गई थी।
जवाब आया… लेकिन सबसे जरूरी रिकॉर्ड गायब
जिला आयुष कार्यालय ने तीनों कर्मचारियों की मूल पदस्थापना बता दी। यह भी बताया कि संबंधित औषधालयों में फिलहाल कौन स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है।
लेकिन जैसे ही बात अटैचमेंट आदेशों और नोटशीट की आई, जवाब अधूरा नजर आया।
आरटीआई के बिंदु क्रमांक-2 में विभाग ने लिखा— “आपकी आरटीआई पोस्टल ऑर्डर क्रमांक 618376 के संलग्नक अनुसार।”
हैरानी की बात यह है कि प्राप्त जवाब के साथ ऐसा कोई संलग्नक था ही नहीं।
यानी विभाग ने संलग्नक का उल्लेख तो किया, लेकिन संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।

सिर्फ एक लाइन… “कलेक्टर के अनुमोदन से”
बिंदु क्रमांक-3 में पूछा गया था कि अटैचमेंट किस नियम अथवा प्रशासनिक आवश्यकता के तहत किया गया? साथ ही संबंधित नोटशीट और दस्तावेज भी मांगे गए थे।
इसके जवाब में विभाग ने सिर्फ इतना लिखा—
“माननीय कलेक्टर महोदय के अनुमोदन से।”
लेकिन यह अनुमोदन किस आदेश पर दिया गया? किस फाइल पर नोटशीट चली? किस अधिकारी ने प्रस्ताव रखा? किस तारीख को अनुमोदन हुआ?
इनमें से किसी भी सवाल का दस्तावेजी जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया।
आखिर आदेश हैं तो प्रतियां क्यों नहीं?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अटैचमेंट वास्तव में कलेक्टर के अनुमोदन से हुआ, तो उस आदेश और फाइल नोटशीट की प्रमाणित प्रतियां देने में परेशानी क्या है? और यदि विभाग स्वयं “संलग्नक” का उल्लेख कर रहा है, तो वह संलग्नक आवेदक तक क्यों नहीं पहुंचा?

RTI कानून का उद्देश्य क्या कहता है?
सूचना का अधिकार अधिनियम केवल “हाँ” या “नहीं” लिखकर जवाब देने के लिए नहीं बनाया गया है। यदि किसी प्रशासनिक निर्णय से संबंधित आदेश, नोटशीट या अभिलेख कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं और उनकी प्रमाणित प्रतियां मांगी गई हैं, तो उन्हें उपलब्ध कराना पारदर्शिता का मूल आधार माना जाता है।
अब पहुंचेगा मामला प्रथम अपील तक
अधूरी जानकारी मिलने के बाद अब इस मामले में प्रथम अपील दायर की जाएगी। अपील में मांग की जाएगी कि जिन अटैचमेंट आदेशों, नोटशीट और अभिलेखों का उल्लेख विभाग ने अपने जवाब में किया है, उनकी प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं। अब देखना यह होगा कि अपीलीय प्राधिकारी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे या फिर जवाब सिर्फ एक पंक्ति तक ही सीमित रहेगा?
(अस्वीकरण: यह समाचार जिला आयुष कार्यालय, नरसिंहपुर द्वारा 24 जून 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दिए गए लिखित उत्तर एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तैयार किया गया है। यदि विभाग भविष्य में कोई अतिरिक्त दस्तावेज या स्पष्टीकरण जारी करता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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