औचक निरीक्षण में सामने आई अव्यवस्था, मो. आरिफ खान लंबे समय से अनुपस्थित मिले; निरीक्षण के दिन सहायक ग्रेड-3 धीरेन्द्र कुमार बोहिया भी गैरहाजिर
नरसिंहपुर। जिला परिवहन कार्यालय नरसिंहपुर में कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह के औचक निरीक्षण ने कार्यालय की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। निरीक्षण में एक कर्मचारी के लंबे समय से अनुपस्थित रहने की स्थिति सामने आई, जबकि निरीक्षण के दिन भी एक अन्य कर्मचारी कार्यालय से गायब मिला। सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह रही कि सितंबर माह की उपस्थिति पंजी में कर्मचारियों के हस्ताक्षर तक नहीं पाए गए।
कलेक्टर ने लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारी मो. आरिफ खान का वेतन आहरण नहीं करने और उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं निरीक्षण के दिन अनुपस्थित मिले सहायक ग्रेड-3 धीरेन्द्र कुमार बोहिया का उस दिन का वेतन आहरित नहीं करने के निर्देश दिए गए।
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कर्मचारी लंबे समय से गायब था तो DTO की निगरानी कहां थी?
यहां से मामला सिर्फ कर्मचारियों की गैरहाजिरी तक सीमित नहीं रहता। सबसे बड़ा सवाल जिला परिवहन कार्यालय की निगरानी व्यवस्था पर है।
यदि मो. आरिफ खान लंबे समय से कार्यालय से अनुपस्थित थे और इसकी जानकारी कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों को थी, तो कलेक्टर के औचक निरीक्षण तक उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
सरकारी कार्यालय में कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति, अनुपस्थिति और कार्यालयीन अनुशासन की निगरानी कार्यालयाध्यक्ष की प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा विषय है। ऐसे में सवाल यह भी है कि लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारी की स्थिति पर जिला परिवहन अधिकारी स्तर से क्या कार्रवाई की गई थी?

सितंबर की उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर नहीं, फिर निगरानी कैसी?
कलेक्टर के निरीक्षण में सितंबर माह की उपस्थिति पंजी पर कर्मचारियों के हस्ताक्षर नहीं होने की बात सामने आई। यह स्थिति कार्यालय की नियमित निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
आखिर उपस्थिति पंजी की नियमित जांच कौन करता है? यदि कर्मचारियों के हस्ताक्षर नहीं हो रहे थे तो यह कमी पहले किस अधिकारी की नजर में आई? क्या कार्यालय स्तर पर उपस्थिति पंजी का प्रतिदिन या नियमित परीक्षण किया जा रहा था?
यदि नहीं, तो कार्यालय में कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की व्यवस्था आखिर किस तरह संचालित हो रही थी?
निरीक्षण के दिन भी कर्मचारी गैरहाजिर
कलेक्टर के निरीक्षण के दिन सहायक ग्रेड-3 धीरेन्द्र कुमार बोहिया भी अनुपस्थित पाए गए। कलेक्टर ने उनके उस दिवस का वेतन आहरित नहीं करने के निर्देश दिए।
सवाल यह है कि यदि कर्मचारी बिना अनुमति कार्यालय से अनुपस्थित था तो उसके विरुद्ध उसी समय कार्यालय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई? क्या कर्मचारियों की अनुपस्थिति की रोजाना समीक्षा होती है या फिर वरिष्ठ अधिकारी के औचक निरीक्षण के बाद ही स्थिति सामने आती है?

कलेक्टर ने देखी वाहन फिटनेस और नागरिक सेवाओं की स्थिति
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने वाहन पंजीयन, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन फिटनेस, प्राप्त आवेदनों और उनके निराकरण की प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने निर्धारित मानकों के अनुरूप वाहनों की फिटनेस जांच सुनिश्चित करने तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
लेकिन कर्मचारियों की उपस्थिति से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद अब नागरिक सेवाओं के साथ-साथ कार्यालयीन अनुशासन भी सवालों के केंद्र में है।
कार्रवाई कर्मचारी पर, लेकिन जवाबदेही व्यवस्था की भी हो
कलेक्टर ने अनुपस्थित कर्मचारियों के संबंध में कार्रवाई के निर्देश देकर प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट संदेश दिया है। लेकिन सवाल यह है कि ऐसी स्थिति बनने से पहले कार्यालय की आंतरिक निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी?
एक कर्मचारी लंबे समय से अनुपस्थित रहा। दूसरे कर्मचारी की गैरहाजिरी कलेक्टर के निरीक्षण के दिन सामने आई। सितंबर की उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर नहीं मिले। इन तीनों तथ्यों को एक साथ देखा जाए तो सवाल केवल कर्मचारियों की जिम्मेदारी का नहीं, बल्कि कार्यालय में निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था का भी बनता है।
जिला परिवहन अधिकारी श्री अनिमेष गढ़पाल निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे। अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारी के संबंध में कार्यालय स्तर पर पहले क्या कार्रवाई की गई थी और उपस्थिति पंजी की स्थिति की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।
SMP24NEWS.COM का सीधा सवाल:
जब कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यालयीन गतिविधियों की निगरानी नियमित रूप से होनी चाहिए, तो लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारी, निरीक्षण के दिन गैरहाजिर कर्मचारी और उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर न होने जैसी कमियां कलेक्टर के औचक निरीक्षण में ही क्यों सामने आईं?
पक्ष: जिला परिवहन अधिकारी एवं संबंधित कर्मचारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी इस खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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