Accessibility (सुगम्यता) दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है। आमतौर पर लोगों को लगता है कि किसी भवन के बाहर एक रैंप बना देना ही सुगम्यता है, जबकि कानून की दृष्टि से यह सोच अधूरी है।
सुगम्यता का अर्थ है—ऐसा वातावरण, भवन, परिवहन, सूचना, संचार, वेबसाइट, डिजिटल सेवाएँ और सार्वजनिक सुविधाएँ तैयार करना, जिनका उपयोग दिव्यांग व्यक्ति भी बिना किसी भेदभाव और बिना किसी अतिरिक्त सहायता के सुरक्षित, सम्मानजनक एवं स्वतंत्र रूप से कर सके।
1. Accessibility (सुगम्यता) की कानूनी परिभाषा
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार Accessibility का अर्थ है कि दिव्यांग व्यक्तियों को भौतिक वातावरण (Physical Environment), परिवहन (Transportation), सूचना एवं संचार (Information & Communication) तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सहित अन्य सार्वजनिक सुविधाओं एवं सेवाओं तक समान और बाधारहित पहुँच उपलब्ध कराई जाए।
यह अवधारणा संयुक्त राष्ट्र दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर अभिसमय (UNCRPD) के अनुच्छेद 9 पर आधारित है। भारत ने UNCRPD पर हस्ताक्षर कर इसे लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके अनुरूप RPwD Act, 2016 बनाया गया।
2. क्या केवल रैंप बना देना पर्याप्त है?
उत्तर है—नहीं।
केवल रैंप बना देने से कोई भवन या संस्था पूरी तरह सुगम नहीं मानी जा सकती।
यदि भवन में—
- लिफ्ट नहीं है,
- व्हीलचेयर के लिए पर्याप्त जगह नहीं है,
- दिव्यांग शौचालय नहीं है,
- दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए स्पर्शनीय मार्ग नहीं है,
- सुनने में अक्षम व्यक्तियों के लिए सूचना की व्यवस्था नहीं है,
तो वह भवन पूर्ण रूप से Accessibility के मानकों पर खरा नहीं उतरता।
सुगम्यता का उद्देश्य हर प्रकार की दिव्यांगता वाले व्यक्ति को समान अवसर प्रदान करना है।
3. भवनों में Accessibility
किसी भी सरकारी या सार्वजनिक भवन में निम्नलिखित सुविधाएँ आवश्यक मानी जाती हैं—
- सुरक्षित एवं मानक अनुसार रैंप
- व्हीलचेयर के अनुकूल प्रवेश द्वार
- पर्याप्त चौड़े कॉरिडोर
- लिफ्ट (जहाँ आवश्यक हो)
- दोनों ओर रेलिंग
- दिव्यांग अनुकूल शौचालय
- आरक्षित पार्किंग
- कम ऊँचाई वाले सेवा काउंटर
- दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए Tactile Path (स्पर्शनीय मार्ग)
- स्पष्ट संकेतक एवं दिशा-निर्देश
- पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था
इन सुविधाओं का उद्देश्य केवल भवन में प्रवेश देना नहीं बल्कि स्वतंत्र रूप से सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना है।
4. डिजिटल Accessibility
आज अधिकांश सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इसलिए डिजिटल सुगम्यता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इसमें शामिल हैं—
- दिव्यांग अनुकूल वेबसाइट
- ऑनलाइन आवेदन प्रणाली
- मोबाइल एप्लिकेशन
- Screen Reader Support
- Accessible PDF
- Keyboard Navigation
- उचित रंग एवं फॉन्ट
- चित्रों के साथ Alt Text
यदि वेबसाइट केवल देखने योग्य हो लेकिन Screen Reader से उपयोग न हो सके, तो उसे पूर्णतः Accessible नहीं माना जा सकता।
5. सूचना की Accessibility
सूचना सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुँचना चाहिए।
दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सूचना निम्न रूपों में उपलब्ध कराई जा सकती है—
- ब्रेल (Braille)
- ऑडियो प्रारूप
- सांकेतिक भाषा (Sign Language)
- Large Print
- Accessible PDF
- सरल भाषा (Easy to Read Format)
सूचना तक समान पहुँच भी दिव्यांग अधिकारों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
6. परिवहन में Accessibility
सुगम परिवहन के बिना शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचना कठिन हो जाता है।
इसलिए सार्वजनिक परिवहन में निम्न सुविधाएँ आवश्यक हैं—
- लो-फ्लोर बसें
- व्हीलचेयर रैंप
- आरक्षित सीटें
- रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट एवं रैंप
- स्पर्शनीय मार्ग
- ऑडियो एवं विजुअल घोषणाएँ
- दिव्यांग अनुकूल हवाई अड्डे
- टैक्सी एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन में आवश्यक सुविधाएँ
7. सरकारी कार्यालयों की जिम्मेदारी
RPwD Act के अनुसार सरकारी संस्थानों का दायित्व है कि वे अपनी सेवाओं को सभी दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ बनाएं।
उदाहरण—
- जिला अस्पताल
- कलेक्ट्रेट
- तहसील
- जनपद पंचायत
- नगर पालिका
- पुलिस कार्यालय
- न्यायालय
- सरकारी विद्यालय एवं महाविद्यालय
इन संस्थानों को केवल भवन ही नहीं बल्कि सेवाओं और सूचना को भी सुगम बनाना चाहिए।
8. निजी संस्थानों की जिम्मेदारी
सुगम्यता केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं है।
कई निजी संस्थानों की भी जिम्मेदारी है कि वे उचित सुविधाएँ उपलब्ध कराएँ, जैसे—
- मॉल
- होटल
- बैंक
- एटीएम
- निजी अस्पताल
- निजी विद्यालय
- कॉलेज
- सिनेमा हॉल
- व्यावसायिक प्रतिष्ठान
जहाँ जनता के लिए सेवाएँ उपलब्ध हैं, वहाँ दिव्यांग व्यक्तियों की पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है।
9. नरसिंहपुर जैसे जिलों की वास्तविक स्थिति
देश के अनेक जिलों की तरह नरसिंहपुर सहित कई स्थानों पर सुगम्यता की दिशा में कार्य हुए हैं, लेकिन अभी भी कई सार्वजनिक भवनों, कार्यालयों और डिजिटल सेवाओं में सुधार की आवश्यकता देखी जाती है।
कुछ स्थानों पर रैंप तो बने हैं, परंतु मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कई भवनों में दिव्यांग अनुकूल शौचालय, आरक्षित पार्किंग, स्पर्शनीय मार्ग, संकेतक, स्क्रीन रीडर समर्थित वेबसाइट या अन्य आवश्यक सुविधाएँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। वास्तविक स्थिति अलग-अलग संस्थानों में भिन्न हो सकती है, इसलिए किसी विशेष भवन या विभाग के संबंध में निष्कर्ष केवल सत्यापित तथ्यों और निरीक्षण के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
10. यदि Accessibility नहीं है तो शिकायत कहाँ करें?
यदि किसी सरकारी या सार्वजनिक स्थान पर आवश्यक सुगम्यता उपलब्ध नहीं है, तो शिकायत निम्न स्तरों पर की जा सकती है—
- संबंधित विभाग के प्रमुख अधिकारी
- जिला कलेक्टर
- जिला दिव्यांग पुनर्वास कार्यालय (यदि उपलब्ध हो)
- राज्य के दिव्यांगजन आयुक्त (Commissioner for Persons with Disabilities)
- संबंधित मंत्रालय या विभाग
- लोक शिकायत पोर्टल
- आवश्यक होने पर न्यायालय
शिकायत के साथ फोटो, वीडियो, दस्तावेज एवं स्थान का विवरण संलग्न करना उपयोगी रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या केवल रैंप बना देने से भवन Accessible हो जाता है?
नहीं। सुगम्यता में कई अन्य आवश्यक सुविधाएँ भी शामिल हैं।
2. Accessibility का उद्देश्य क्या है?
दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर एवं स्वतंत्र पहुँच उपलब्ध कराना।
3. क्या निजी संस्थानों पर भी यह लागू होता है?
हाँ, जहाँ जनता को सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
4. क्या वेबसाइट भी Accessible होनी चाहिए?
हाँ, सरकारी एवं अनेक सार्वजनिक डिजिटल सेवाओं में डिजिटल सुगम्यता आवश्यक है।
5. क्या PDF भी Accessible होनी चाहिए?
हाँ, विशेषकर यदि वह सार्वजनिक सूचना का माध्यम हो।
6. क्या बैंकों में Accessibility आवश्यक है?
हाँ, बैंकिंग सेवाएँ सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए।
7. क्या अस्पतालों में दिव्यांग शौचालय होना चाहिए?
हाँ, जहाँ आवश्यक हो वहाँ ऐसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
8. क्या रेलवे स्टेशन पर भी Accessibility लागू होती है?
हाँ, रैंप, लिफ्ट, संकेतक और अन्य सुविधाएँ महत्वपूर्ण हैं।
9. क्या स्कूल एवं कॉलेज भी इसके अंतर्गत आते हैं?
हाँ, शिक्षा संस्थानों में भी सुगम्यता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
10. यदि कार्यालय में सुविधा नहीं हो तो क्या करें?
संबंधित विभाग को लिखित शिकायत दें और आवश्यकता होने पर उच्च अधिकारियों या दिव्यांगजन आयुक्त से संपर्क करें।
11. क्या Accessibility केवल व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए है?
नहीं। यह दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, बौद्धिक, मानसिक, ऑटिज़्म, सेरेब्रल पाल्सी सहित सभी प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए है।
12. क्या RPwD Act में Accessibility अनिवार्य है?
हाँ। यह अधिनियम का मूल उद्देश्य है और सरकारी नीतियों तथा सेवाओं में इसे सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।
निष्कर्ष
सुगम्यता केवल एक रैंप लगाने तक सीमित नहीं है। यह ऐसा समावेशी वातावरण तैयार करने की प्रक्रिया है, जहाँ प्रत्येक दिव्यांग व्यक्ति बिना भेदभाव, सम्मानपूर्वक और स्वतंत्र रूप से भवनों, परिवहन, सूचना, डिजिटल सेवाओं तथा सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग कर सके। RPwD Act, 2016 और UNCRPD का मूल संदेश यही है कि समाज की हर व्यवस्था सभी नागरिकों के लिए समान रूप से सुलभ हो।
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भाग 3: RPwD Act में Barrier (बाधा) क्या है?
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