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मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 10 साल बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश, लाखों सरकारी कर्मचारियों को राहत दर्शाती फीचर्ड इमेज

10 साल बाद खुला प्रमोशन का रास्ता! MP सरकार का बड़ा फैसला, लाखों कर्मचारियों को मिल सकती है राहत

भोपाल, 30 जून 2026 | SMP24NEWS.COM

मध्यप्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत की खबर सामने आई है। करीब एक दशक से रुकी हुई पदोन्नति (Promotion) प्रक्रिया अब दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 30 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए सभी विभागों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को विधिक परामर्श के आधार पर आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद विभिन्न विभागों में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें आयोजित होने और पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

http://मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की आधिकारिक वेबसाइट देखने के लिए यहां क्लिक करें: https://gad.mp.gov.in/

करीब 10 साल से अटकी हुई थी पदोन्नति

मध्यप्रदेश में पदोन्नति नियमों को लेकर लंबे समय से न्यायालय में विभिन्न याचिकाएं लंबित हैं। इसी कारण वर्षों से अधिकांश विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया ठप पड़ी हुई थी। इसका सीधा असर हजारों कर्मचारियों के करियर पर पड़ा। कई कर्मचारी वर्षों तक पदोन्नति का इंतजार करते रहे, जबकि अनेक अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो गए लेकिन उन्हें समय पर प्रमोशन नहीं मिल सका।

अब शासन ने महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सी.एस. वैद्यनाथन से प्राप्त विधिक राय के आधार पर स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

मध्यप्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 30 जून 2026 को जारी पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ करने संबंधी आधिकारिक आदेश की प्रति
मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 30 जून 2026 को जारी वह आधिकारिक पत्र, जिसमें मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 के अंतर्गत पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

आखिर सरकार ने अब क्यों लिया फैसला?

सरकार द्वारा प्राप्त कानूनी राय में बताया गया है कि पहले न्यायालय की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक मौखिक आश्वासन दिया गया था कि मामला लंबित रहने तक पदोन्नति नहीं की जाएगी। लेकिन यह आश्वासन न तो किसी शपथपत्र (Affidavit) का हिस्सा था और न ही न्यायालय के आदेश में दर्ज किया गया था।

विधिक राय में यह भी कहा गया है कि अब परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं। जिस पीठ (Bench) के समक्ष मामला लंबित था, उसके न्यायाधीशों के स्थानांतरण एवं पदोन्नति के कारण अब सुनवाई नए सिरे से होगी। ऐसे में पुराने मौखिक आश्वासन को वर्तमान परिस्थितियों में बाध्यकारी नहीं माना जा सकता।

प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा था असर

शासन ने अपने आदेश में यह भी स्वीकार किया है कि लंबे समय तक पदोन्नति नहीं होने से सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है। वरिष्ठ पद लगातार खाली पड़े हैं, जिसके कारण विभागों की कार्यक्षमता पर असर पड़ा है।

विधिक परामर्श में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में कई विभाग अपनी स्वीकृत पद संख्या (Sanctioned Strength) के लगभग 40 प्रतिशत संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं। इसका असर केवल कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि आम जनता को मिलने वाली सरकारी सेवाओं पर भी पड़ रहा है। कई स्थानों पर पद खाली होने से प्रशासनिक निर्णयों में देरी और कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयों की स्थिति बनी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला

विधिक राय में उच्चतम न्यायालय के कई महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया गया है। इनमें कहा गया है कि केवल मौखिक आश्वासन किसी कानूनी आदेश के समान नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह न्यायालय के आदेश या शपथपत्र का हिस्सा न हो।

इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पदोन्नति नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं, तो केवल इसी आधार पर सरकार विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित करने से नहीं रोकी जा सकती। हालांकि, दी जाने वाली पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।

सभी विभागों को दिए गए निर्देश

सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय केटेसरिया द्वारा जारी आदेश में सभी विभागों के प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष एवं जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि वे महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा दिए गए विधिक परामर्श के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

इसका अर्थ यह है कि अब विभाग अपनी-अपनी विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठक बुलाकर पात्र कर्मचारियों के मामलों पर विचार कर सकेंगे।

कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है?

इस आदेश से उन कर्मचारियों को सबसे बड़ी राहत मिल सकती है जो कई वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि विभाग समय पर DPC आयोजित करते हैं तो रिक्त पदों पर पदोन्नति का रास्ता खुलेगा। इससे कर्मचारियों को उच्च पद, वेतनमान और जिम्मेदारियां मिलने का अवसर मिलेगा। साथ ही खाली होने वाले निचले पदों पर नई भर्तियों का रास्ता भी आसान हो सकता है।

हालांकि कर्मचारियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। यदि भविष्य में अदालत कोई अलग निर्णय देती है, तो उसका प्रभाव पदोन्नति प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

अब आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर संबंधित विभागों पर रहेगी। यदि विभाग शीघ्र DPC की बैठकें आयोजित करते हैं, तो वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। दूसरी ओर, यदि प्रक्रिया में फिर देरी होती है, तो कर्मचारियों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लग सकता है।

फिलहाल इतना तय है कि सामान्य प्रशासन विभाग के इस आदेश ने करीब दस वर्षों से बंद पड़े प्रमोशन के रास्ते को फिर से खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा दिया है।


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1. क्या मध्यप्रदेश में प्रमोशन प्रक्रिया शुरू हो गई है?
उत्तर: सामान्य प्रशासन विभाग ने 30 जून 2026 को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

प्रश्न 2. क्या सभी कर्मचारियों को तुरंत प्रमोशन मिल जाएगा?
उत्तर: नहीं। पहले संबंधित विभागों में DPC की बैठक होगी, उसके बाद पात्र कर्मचारियों को नियमों के अनुसार पदोन्नति दी जाएगी।

प्रश्न 3. क्या हाईकोर्ट में मामला अभी भी लंबित है?
उत्तर: हाँ, पदोन्नति नियमों से संबंधित याचिकाएं अभी भी लंबित हैं, लेकिन शासन ने विधिक राय के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

प्रश्न 4. क्या प्रमोशन पर कोर्ट के फैसले का असर पड़ेगा?
उत्तर: हाँ। शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।

प्रश्न 5. सरकार ने अब यह फैसला क्यों लिया?
उत्तर: वर्षों से प्रमोशन नहीं होने के कारण कई पद खाली हैं, प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं और विभाग सीमित स्टाफ के साथ काम कर रहे हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

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