भोपाल, 1 जुलाई 2026 | SMP24NEWS.COM
मध्यप्रदेश में ई-अटेंडेंस (e-Attendance) को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने 1 जुलाई 2026 को जारी एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन विद्यालयों में अब तक शत-प्रतिशत ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो रही है और इसके बावजूद संबंधित संकुल प्राचार्यों ने शिक्षकों के वेतन देयक अग्रेषित कर दिए हैं, उनके विरुद्ध निलंबन अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाए।
आयुक्त लोक शिक्षण अभिषेक सिंह द्वारा जारी इस आदेश को प्रदेश के सभी संभागीय संयुक्त संचालकों, जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भेजा गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक कार्रवाई की जानकारी संचालनालय को नहीं भेजी गई, तो संबंधित संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी भी कार्रवाई से नहीं बच पाएंगे।
90 प्रतिशत तक पहुंची ई-अटेंडेंस, फिर भी विभाग असंतुष्ट
लोक शिक्षण संचालनालय ने अपने आदेश में कहा है कि विभाग द्वारा पहले भी कई बार ई-अटेंडेंस को लेकर निर्देश जारी किए जा चुके हैं। 20 जून 2025 को नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 9 जून 2026 को एक और आदेश जारी कर स्पष्ट किया गया था कि जो शिक्षक ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करेंगे, उनकी वेतन कटौती की जाएगी।
इसके बावजूद विभाग के अनुसार वर्तमान में ई-अटेंडेंस की औसत उपस्थिति लगभग 90 प्रतिशत ही है। इसका अर्थ यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं कर रहे हैं। संचालनालय ने इसे शासन के निर्देशों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि इससे शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और विद्यालयों में पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठते हैं।

अब संकुल प्राचार्य भी होंगे जिम्मेदार
नए आदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब केवल शिक्षकों पर ही नहीं बल्कि संकुल प्राचार्यों पर भी जवाबदेही तय की गई है।
यदि किसी विद्यालय में शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं और इसके बावजूद संबंधित संकुल प्राचार्य उनके वेतन देयक अग्रेषित करते हैं, तो उनके विरुद्ध निलंबन अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। यानी अब विभाग यह मानकर चल रहा है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी केवल शिक्षक की नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की भी है।
2 जुलाई तक मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
आदेश में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जिन मामलों में कार्रवाई बनती है, उनमें तत्काल कार्रवाई प्रारंभ कर उसकी जानकारी 2 जुलाई 2026 तक लोक शिक्षण संचालनालय को भेजी जाए। यह समय सीमा बेहद कम रखी गई है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि विभाग इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं चाहता।
DEO और संयुक्त संचालकों पर भी कार्रवाई की चेतावनी
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जिला शिक्षा अधिकारी या संयुक्त संचालक समय पर कार्रवाई नहीं करते हैं या रिपोर्ट संचालनालय को नहीं भेजते हैं, तो उनके विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी। यानी इस बार विभाग ने जिम्मेदारी तय करने की पूरी श्रृंखला निर्धारित कर दी है।
पहले वेतन कटौती, अब अनुशासनात्मक कार्रवाई
ई-अटेंडेंस को लेकर विभाग की सख्ती लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
- पहले नियमित रूप से ई-अटेंडेंस लगाने के निर्देश दिए गए।
- उसके बाद ई-अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों के वेतन काटने का आदेश जारी हुआ।
- अब ऐसे मामलों में संकुल प्राचार्यों के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इससे स्पष्ट है कि विभाग अब ई-अटेंडेंस व्यवस्था को पूरी तरह लागू कराने के लिए कठोर प्रशासनिक कदम उठा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश?
प्रदेश के हजारों सरकारी शिक्षक, संकुल प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग के अधिकारी इस आदेश से सीधे प्रभावित होंगे।
यदि कोई शिक्षक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करता है तो उसका असर केवल उसके वेतन पर ही नहीं बल्कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विद्यालयों में उपस्थिति व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
लोक शिक्षण संचालनालय का यह नया आदेश साफ संकेत देता है कि मध्यप्रदेश सरकार अब ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। शिक्षकों के साथ-साथ संकुल प्राचार्यों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संयुक्त संचालकों की जवाबदेही तय कर विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शासन के निर्देशों का पालन हर स्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1. यह आदेश कब जारी हुआ?
उत्तर: 1 जुलाई 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश द्वारा।
प्रश्न 2. कार्रवाई किसके खिलाफ होगी?
उत्तर: ई-अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों के वेतन देयक अग्रेषित करने वाले संकुल प्राचार्यों के विरुद्ध।
प्रश्न 3. कार्रवाई की रिपोर्ट कब तक भेजनी होगी?
उत्तर: 2 जुलाई 2026 तक।
प्रश्न 4. यदि DEO कार्रवाई नहीं करते तो क्या होगा?
उत्तर: संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी और संयुक्त संचालक के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
प्रश्न 5. विभाग ने ई-अटेंडेंस कितनी बताई है?
उत्तर: लगभग 90 प्रतिशत।
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