पद शासन से स्वीकृत है या नहीं, इसका दस्तावेज नहीं; RMO का प्रभार देने का अधिकार किसके पास है, इसका नियम भी उपलब्ध नहीं
नरसिंहपुर। जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर में RMO यानी प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी जाती रही है, लेकिन इस व्यवस्था का प्रशासनिक और नियमगत आधार ही सवालों के घेरे में है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में जिला चिकित्सालय कार्यालय ने RMO पद की शासकीय स्वीकृति से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात कही है। इतना ही नहीं, RMO का प्रभार देने का अधिकार किस सक्षम प्राधिकारी को है और यह प्रभार किन नियमों या शासनादेशों के तहत दिया जाता है, इसका रिकॉर्ड भी कार्यालय में उपलब्ध नहीं बताया गया।
कार्यालय ने दोनों मामलों में एक ही कारण बताया है—संबंधित दस्तावेज आगजनी की घटना से प्रभावित हो गए हैं।
RMO का पद स्वीकृत है या नहीं, रिकॉर्ड में जवाब नहीं
RTI में पहला सवाल बेहद सीधा था। जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर में RMO पद शासन द्वारा स्वीकृत है या नहीं, इसकी जानकारी के साथ पद स्वीकृति आदेश, भर्ती एवं सेवा नियम तथा RMO के कार्य, कर्तव्य और अधिकार निर्धारित करने वाले शासनादेश, नियम एवं परिपत्रों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।
जिला चिकित्सालय कार्यालय ने इसके जवाब में लिखा—
“इस कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। उक्त दस्तावेज आगजनी घटना से प्रभावित हो गया है।”
यानी कार्यालय ने यह नहीं बताया कि RMO पद शासन से स्वीकृत है या नहीं। केवल संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई।
इसलिए उपलब्ध RTI के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि RMO का पद गैर-स्वीकृत है। लेकिन यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि जिस पद के नाम से जिला अस्पताल में प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, उसकी स्वीकृति से संबंधित मूल दस्तावेज वर्तमान कार्यालयीय रिकॉर्ड में कहां हैं।

प्रभार देने की शक्ति किसके पास, इसका भी रिकॉर्ड गायब
RTI के दूसरे बिंदु में इससे भी महत्वपूर्ण सवाल पूछा गया था। इसमें पूछा गया कि RMO का प्रभार देने का अधिकार किस सक्षम प्राधिकारी को प्राप्त है और यह प्रभार किन नियमों या शासनादेशों के तहत दिया जाता है। संबंधित शासनादेश, नियम और परिपत्रों की प्रमाणित प्रतियां भी मांगी गई थीं।
इसका जवाब भी लगभग वही रहा—
“इस कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। उक्त दस्तावेज आगजनी घटना से प्रभावित हो गया है।”
यानी RTI के जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि RMO का प्रभार देने वाला सक्षम अधिकारी कौन है और उसके अधिकार का आधार क्या है।
यहीं से जिला अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल सामने आता है।
प्रभार के आदेश हैं, लेकिन अधिकार का आधार नहीं
RTI के तीसरे बिंदु में RMO पद पर पदस्थ या प्रभारी रहे अधिकारियों के पदस्थापना, प्रभार और कार्यमुक्ति आदेश मांगे गए थे। इसके जवाब में कार्यालय ने “संलग्न है” कहते हुए दस्तावेज उपलब्ध कराए।
इससे RMO/प्रभारी अधिकारी के रूप में प्रभार सौंपे जाने से संबंधित आदेशों का रिकॉर्ड सामने आया है, लेकिन उस व्यवस्था की बुनियादी जानकारी—पद स्वीकृत किस आदेश से है और RMO का प्रभार देने की शक्ति किस अधिकारी के पास है—इन दोनों सवालों पर कार्यालय ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
एक तरफ प्रभार के आदेश मौजूद हैं, दूसरी तरफ उन आदेशों के पीछे का नियमगत आधार RTI में सामने नहीं आया।
आगजनी के बाद रिकॉर्ड कहां से आएगा
कार्यालय ने दस्तावेजों के उपलब्ध नहीं होने का कारण आगजनी बताया है। ऐसे में अब सवाल केवल पुराने रिकॉर्ड के नष्ट या प्रभावित होने तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि RMO पद की स्वीकृति और प्रभार देने की अधिकारिता से संबंधित दस्तावेज क्या विभाग के किसी अन्य कार्यालय, वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी, क्षेत्रीय कार्यालय या अन्य आधिकारिक अभिलेख में उपलब्ध हैं।
यदि जिला अस्पताल कार्यालय में मूल रिकॉर्ड आगजनी से प्रभावित हुए हैं, तो संबंधित शासनादेश और स्वीकृति संबंधी रिकॉर्ड अन्य विभागीय स्तरों पर उपलब्ध होने की स्थिति भी जांच का विषय बनती है।
अब सामने आने चाहिए तीन अहम दस्तावेज
RTI से सामने आई स्थिति के बाद जांच का अगला चरण तीन दस्तावेजों पर केंद्रित हो सकता है।
पहला, RMO पद की शासकीय स्वीकृति का आदेश।
दूसरा, RMO का प्रभार देने की शक्ति निर्धारित करने वाला शासनादेश या विभागीय नियम।
तीसरा, संबंधित अधिकारियों को RMO का प्रभार दिए जाने से पहले सक्षम स्तर से प्राप्त स्वीकृति या अनुमोदन का रिकॉर्ड।
जब तक ये दस्तावेज सामने नहीं आते, तब तक यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर में RMO/प्रभारी अधिकारी की व्यवस्था किस निर्धारित नियम और किस सक्षम प्राधिकारी की शक्ति के तहत संचालित होती रही।
RTI ने सवाल का जवाब नहीं, बल्कि नया सवाल खड़ा किया
इस पूरे मामले में फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज यह नहीं कहते कि RMO का पद स्वीकृत नहीं है या किसी अधिकारी को दिया गया प्रभार अवैध है। लेकिन RTI से यह जरूर सामने आया है कि जिला अस्पताल कार्यालय RMO पद की स्वीकृति और RMO का प्रभार देने की अधिकारिता से संबंधित मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका।
आगजनी में रिकॉर्ड प्रभावित होने की वजह से दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने का जवाब दिया गया है। अब सवाल यह है कि RMO की व्यवस्था जिस नियम पर आधारित है, उसका आधिकारिक रिकॉर्ड आखिर किस कार्यालय में मौजूद है।
यही दस्तावेज यह स्पष्ट कर सकते हैं कि जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर में RMO का प्रभार देने की प्रक्रिया वास्तव में किस नियम और किस सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आती है।
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